उपायुक्त कार्यालय के बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते सीटू कार्यकर्ता।
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चंबा। श्रम कानूनों में बदलाव और सरकारी क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में सीटू ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। करीब एक घंटे तक सीटू कार्यकर्ता उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त डीसी राणा के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें सरकारी क्षेत्र का निजीकरण बंद करने के साथ श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों को रद्द करने की मांग की गई।
सीटू जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने बताया कि किसान मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं लेकिन सरकार किसानों की मांगों को अनसुना कर रही है। इसकी वजह से किसानों में सरकार के प्रति रोष है। सरकार मजदूर विरोधी श्रम कानूनों को लागू कर कारोबारियों को लाभ पहुंचा रही है। इसलिए सीटू ने इन कानूनों को रद्द करने की मांग उठाई है।
कहा कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। इसके अलावा बिजली विधेयक 2020 को वापस लेने, मनरेगा वर्करों को 200 दिन का रोजगार और न्यूनतम वेतन देने के साथ ही सरकार से न्यूनतम वेतन 21000 रुपये घोषित करने और उद्योगों में स्थानीय और प्रभावित लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग की गई। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि इन मांगों को शीघ्र पूरा किया जाए अन्यथा सीटू को मांगें मनवाने के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।