दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में चोला डोरा वेशभूषा को बनाते किशोरी अत्रि।स्रोत जागरूक पाठक
चंबा। जिले के तीन कारीगरों ने गुरुग्राम में केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेकर हिमाचली पारंपरिक वेशभूषा और कढ़ाई कला को एक मंच पर पेश किया। उन्होंने चिट्टा चोला, काला डोरा और चंबा रुमाल की विशेषताओं को न केवल प्रदर्शित किया बल्कि निर्माण प्रक्रिया भी दर्शाई। भरमौर विधानसभा क्षेत्र के किशोरी लाल अत्री ने गद्दी पारंपरिक वेशभूषा चिट्टा चोला व काला डोरा पहने हुए उस परिधान के निर्माण और उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने मशीन पर उस वेशभूषा का निर्माण भी दर्शाया, जिससे उपस्थित लोग अचंभित रह गए। उन्होंने बताया कि पुरुषों का यह परिधान 7,000 से 15,000 रुपये और महिलाओं का 4,500 से 10,000 रुपयेमें उपलब्ध होता है।
इसके साथ ही संतोष कुमारी और रीना ने हाथ से कढ़ाई करके चंबा रुमाल का निर्माण प्रक्रिया दिखाया। इस रुमाल की विशेषता यह होती है कि दोनों ओर से यह एक जैसा दिखता है डिजाइनिंग और बुनाई की इस जटिल तकनीक ने दर्शकों का ध्यान खींचा। उधर, भरमौर के विधायक डॉ. जनकराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वदेशी उत्थान नीति के चलते हिमाचली पारंपरिक परिधानों को इस तरह बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया जाना संभव हो पा रहा है।