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Chamba Road Accident: मिंजर मेला देखने घर लौट रही कीर्ति की सड़क हादसे में मौत, अधूरे रह गए सपने

Wed, 29 Jul 2026 11:46 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा।

सार

मिंजर मेला देखने घर लौट रही कीर्ति की चंबा के लाहड़ के पास सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की जान चली गई। मां बेटी के स्वागत और मेले की तैयारी कर रही थी, लेकिन घर में खुशियों की जगह मातम छा गया। कीर्ति का वकील बनने का सपना भी अधूरा रह गया।
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चंबा सड़क हादसा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का आनंद लेने की तैयारी कर रहा एक परिवार एक दर्दनाक सड़क हादसे का शिकार हो गया। लाहड़ के समीप हुई इस दुर्घटना में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की दुखद मृत्यु हो गई, जिसमें चंडीगढ़ से घर लौट रही कीर्ति भी शामिल थी। जिस बेटी के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं, उसकी अर्थी घर पहुंची तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं।

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मेले की उम्मीदें, मौत का इंतजार
कीर्ति, अपनी मां सुदर्शना और छोटे भाई विशाल के साथ मिंजर मेले में घूमने और खरीदारी करने की योजना बना रही थी। चंडीगढ़ से अपने चाचा के साथ कार में हंसी-खुशी घर लौट रही कीर्ति को इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दूरी पर मौत उसका इंतजार कर रही है। इस भीषण हादसे ने परिवार की सारी खुशियां पलभर में छीन लीं और एक खुशहाल घर को मातम में बदल दिया।

मेधावी बेटी के अधूरे सपने
कीर्ति बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थी। उसकी मां सुदर्शना, जो एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, सीमित आय के बावजूद अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर वकील बनाना चाहती थीं। उन्होंने हर मुश्किल का सामना करते हुए कीर्ति की पढ़ाई जारी रखी और बेटी भी मां के सपनों को साकार करने के लिए पूरी लगन से जुटी थी। लेकिन एक पल में उसके सारे सपने अधूरे रह गए।

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परिवार पर दुखों का पहाड़
यह पहला अवसर नहीं था जब इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा हो। करीब आठ वर्ष पूर्व, कीर्ति के पिता केसर सिंह की भी एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद, मां सुदर्शना ने अकेले ही बेटे-बेटी की परवरिश की और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बच्चों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। अब इस दूसरे दर्दनाक हादसे ने उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद भी छीन ली।

घर में सिर्फ सिसकियां और यादें
घर पर छोटा भाई विशाल अपनी बहन के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, उसे विश्वास था कि बहन के आने से मिंजर मेले की रौनक और बढ़ जाएगी। लेकिन जिस घर में हंसी-खुशी गूंजने वाली थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां और यादें शेष रह गई हैं। कीर्ति के अधूरे सपने और परिवार का यह असहनीय दर्द पूरे क्षेत्र को गमगीन कर गया है। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक गहरी त्रासदी है, जो जीवन की अनिश्चितता और सड़क सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है।
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