चंबा। ऐतिहासिक चंबा चौगान भोले के जयघोष से गूंज उठा है। पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह से 250 किलोमीटर का सफर तय कर कंधों पर देव चिह्न उठाकर शिवभक्त चंबा पहुंचे हैं।
जत्थे के जिला मुख्यालय में प्रवेश के साथ ही जिला मुख्यालय बम-बम भोले और शिव के जयकारों से गूंजने लगा। चंबा चौगान की परिक्रमा करने के बाद जत्थे में शामिल कुछ श्रद्धालुओं ने अपने चिह्न चौगान के बीच गाड़ दिए। कुछ श्रद्धालुओं ने अपने देव चिह्न कलाकेंद्र की स्टेज पर विराजमान किए। इसके बाद भजनों का दौर शुरू हो गया। महिलाएं और पुरुष भोले के भजनों पर झूमते नजर आए। शहर के लोग भी भजनों को सुनने के लिए चौगान मैदान में पहुंच गए। भजनों में मग्न हुए शिवभक्त भजनों पर नृत्य करते भी नजर आएं।
होटल-ढाबा संचालकों को कारोबार चमकने की उम्मीद
विश्वप्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा के लिए पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर से शिवभक्तों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है। भद्रवाह से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से पूरा जिला शिवभक्ति रस में डूब गया है। मणिमहेश के पवित्र डल में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं के जत्थे पहुंचने का क्रम शुरू होने से होटल और ढाबा संचालकों को काम में तेजी आने की उम्मीद जगी है। मणिमहेश के पवित्र डल में डुबकी लगाने के बाद लक्ष्मीनाथ मंदिर में माथा टेकने के लिए अधिकतर श्रद्धालु मुख्यालय में ही रात्रि विश्राम के लिए रुक रहे हैं।
शिवभक्तों की मांग पर लगाएंगे अस्थायी टेंट
एाडीएम नागरिक अरुण शर्मा ने बताया कि मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की मांग पर चौगान मैदान में अस्थायी टेंट स्थापित करवा दिए जाएंगे। अभी यात्रा प्रशासनिक तौर पर शुरू नहीं हो पाई है। इसके अलावा भी यदि उनके पास मांग पहुंचती है तो श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था करवा दी जाएगी।
श्रद्धालुओं के पड़ाव को लेकर सफाई कर्मियों के साथ बहस
भद्रवाह से शिवभक्तों का जत्था चंबा चौगान स्थित कलाकेंद्र की स्टेज पर पहुंचा तो वहां पहले से रह रहे सफाई कर्मियों और श्रद्धालुओं के बीच हल्की बहस हो गई। सफाई कर्मियों का तर्क था कि प्रशासन ने उन्हें यह स्थान ठहरने के लिए दिया है। दूसरी ओर, श्रद्धालु यह तर्क देते नजर आए कि हर साल उनका पहला पड़ाव यहीं पड़ता है। कुछ देर बाद ही दोनों पक्षों ने कलाकेंद्र में एक-एक तरफ अपनी व्यवस्था कर ली।