सलून गांव की इस पहाड़ी पर स्थित घर हो गए थे आपदा का शिकार।/आपदा प्रभावित।
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आपदा के जख्मों पर मरहम का इंतजार कर रहे प्रभावित परिवार मायूस हैं। सरकार ने दावा किया था कि प्रभावितों को मकान बनाने के लिए सात-सात लाख रुपये दिए जाएंगे लेकिन चंबा के होली क्षेत्र के सलून गांव के प्रभावितों को केवल तीन-तीन लाख ही मिले। साल 2025 की आपदा में रावी की बाढ़ में गांव के सात परिवारों के घर बह गए। जमीन भी बह गई है। प्रभावित किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं। रावी नदी में सुरक्षा दीवार नहीं लग पाई है। आगामी बरसात में बाढ़ आई तो जो थोड़ी बहुत जमीन बची है वह भी बह जाएगी।
ग्रामीणों के सामने मकान बनाने की चुनौती है। सरकार सुरक्षित जगह पर जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाई है। प्रभावित चमन लाल, संतोष कुमार, राकेश कुमार, बलदेव, त्रिदेव और आकाश ने कहा कि पिछले साल अगस्त में बरसात ने तबाही मचाई थी। अब तक गांव में कोई भी बचाव कार्य नहीं किए गए हैं। रास्तों तक का निर्माण नहीं हो पाया है। तबाही के पीछे पावर प्रोजेक्ट जिम्मेदार है। प्रोजेक्ट को बचाने के लिए रावी नदी के तट पर कंक्रीट की दीवार बनाई है जिस कारण पानी का बहाव गांव की ओर मुड़ गया।
इधर, भरमौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर बग्गा से लूणा तक सड़क पूरी तरह से रावी में बह गई थी। उसकी भरपाई का कार्य अभी तक चला हुआ है। बत्ती दी हट्टी नामक स्थान भूस्खलन का हॉट स्पॉट बन चुका है। बारिश होने पर भूस्खलन शुरू हो जाता है। एनएच की मरम्मत पर 60 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं।
वहीं, ग्राम पंचायत मैहला के लुहारका में टिपरी में पिछली बरसात में भूस्खलन से काफी नुकसान हुआ। श्मशानघाट जाने वाला रास्ता बह गया। लुहारका गांव के निवासी चमन सिंह के मकान को खतरा पैदा हो गया है। नींव बाहर निकल गई है लेकिन अभी तक सरकार ने डंगा लगाने की व्यवस्था नहीं की। ग्राम पंचायत गैहरा में पिछले साल बादल फटने से 20 परिवारों के खेत नाले में बदल गए। परिवारों की कोई मदद नहीं की गई।