चंबा। जिले के ऊपरी इलाकों में पैदा होने वाला सेब भी 15 दिन बाद मंडियों में दस्तक दे सकता है। अभी तीसा और सलूणी क्षेत्रों का सेब दिल्ली और पंजाब की मंडियों में पहुंच रहा है। जिले में तैयार होने वाला गेल गाला, टाइडमैन, रेड चीफ और अर्ली जून वैरायटी का सेब मार्केट में पहुंचने लगा है।
उधर, बारिश के बाद सेब का आकार बढ़ने और रंग भी अच्छा होने की बागवानों को उम्मीद बढ़ गई है। बागवानों का कहना है हाल ही में हुई बारिश सेब की फसल के लिए काफी फायदेमंद है। इससे सेब का आकार भी बढ़ेगा और इसकी रंगत में निखार भी आएगा। उन्होंने कहा कि सेब बहुल क्षेत्र में काफी समय से बागवानों को बारिश का इंतजार था। बीते महीने से बारिश नहीं होने के कारण सेब का आकार नहीं बढ़ पा रहा था। इससे बागवानों की चिंता बढ़ती जा रही थी। बारिश के होते ही बागवानों के चेहरों पर रौनक लौटी है। अब सेब के रंग में भी परिर्वतन होता नजर आएगा।
गौरतलब है कि जिले में 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की पैदावार होती है। इससे सैकड़ों बागवान जुड़े हैं। बागवान हर साल 60 से 70 हजार पेटी का उत्पादन करते हैं। हालांकि, इस बार पैदावार पिछले साल की अपेक्षा से कम है, लेकिन उन्हें सेब के दाम अच्छे मिलने की उम्मीद है। बागवानों में संजीव कुमार, महिंद्र कुमार, धारो राम, प्रदीप सिंह, किशन चंद और खेम राज ने कहा कि लंबे समय से बारिश नहीं हो रही थी, जबकि सेब के बगीचों को इन 15 दिन तक बारिश की काफी आवश्यकता है। बारिश होने के बाद सेब का आकार बढ़ने लगता है और सेब में भी रंगत आने लगती है। बारिश के न होने से सेब छोटा पड़ रहा था। रंग भी फीका रहा गया था। अब बारिश के होते ही अब उन्हें आकार छोटा रहने की चिंता नहीं हैं। हालांकि, विभाग ने भी यह दावा किया है कि यह बारिश सेब के आकार और रंगत के लिए अच्छी हैं। कहा कि 15 दिन बाद सेब मंडियों तक पहुंचने के लिए तैयार होगा।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डाॅ. प्रमोद शाह ने कहा कि यह बारिश सेब के बगीचों के फसल अच्छी है। इससे सेब के आकार में बढ़ोतरी होगी। साथ ही रंग में भी परिवर्तन होगा। ऊपरी इलाकों में पैदा होने वाला सेब भी 15 दिन बाद मंडियों में दस्तक दे सकता है।