मेडिकल कॉलेज में दो साल से बंद पड़ी कैंसर रोग की ओपीडी
इलाज के लिए शिमला या कांगड़ा जा रहे जिले के मरीज, पांच हजार है कैंसर रोगियों की संख्या
दो साल पहले तीन विशेषज्ञ दे रहे थे सेवाएं, किसी भी नेता ने नहीं दिखाई पद भरने में दिलचस्पी
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। प्रदेश में भले ही सत्ता में परिवर्तन हो गया हो, लेकिन सत्ता परिवर्तन के दो साल बाद भी चंबा मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों को लेकर किसी प्रकार का परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है। मेडिकल कॉलेज में कैंसर ओपीडी दो साल से बंद पड़ी है। इसके चलते आकांक्षी जिले के करीब पांच हजार कैंसर रोगियों को इलाज करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। स्वास्थ्य जांच के लिए भी उन्हें टांडा या शिमला की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे नजदीक किसी भी सरकारी अस्पताल में उन्हें कैंसर रोग विशेषज्ञ की सुविधा नहीं मिल रही है। विधानसभा सत्र के दौरान अब तक सत्ता पक्ष हों या विपक्ष जिला के किसी भी विधायक ने कैंसर रोग विशेषज्ञ की चंबा में तैनाती करवाने का मुद्दा नहीं उठाया है। इसके चलते प्रदेश सरकार इस पद को भरने में गंभीरता नहीं दिखा रही है।
मेडिकल कॉलेज के भवन निर्माण में बजट को लेकर जहां सदर के कांग्रेस विधायक नीरज नैय्यर सरकार की तारीफों के पुल बांधते हैं। भरमौर विस क्षेत्र के भाजपा विधायक डॉ. जनक राज चंबा में आईसीयू सुविधा का मुद्दा उठाकर खुद की पीठ थपथपाते हैं, लेकिन दोनों विधायकों के अलावा जिला के अन्य तीन विधायकों ने भी मेडिकल कॉलेज में चल रही कैंसर रोग विशेषज्ञ की कमी को लेकर एक बार भी पुरजोर तरीके से विधानसभा में अपनी आवाज बुलंद नहीं की है। जिलेे के कैंसर रोगी अपना इलाज करवाने के लिए पूर्ण रूप से इसी मेडिकल कॉलेज पर निर्भर हैं। ऐसे में जिला के पांचों विधायकों को अपनी राजनीति की भावना से ऊपर उठकर जिले के मरीजों के इलाज के लिए इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए।
उधर, मेडिकल कॉलेज के मीडिया समन्वयक डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि सरकार को विशेषज्ञ की कमी के बारे में अवगत करवाया जा चुका है। जल्द ही सरकार चंबा में कैंसर रोग विशेषज्ञ की तैनाती कर सकती है। हालांकि सरकार कुछ माह पहले भी चंबा में चिकित्सकों की तैनाती की थी।