चंबा। पिछले कुछ दिनों से निजी बसों के ओवरलोड होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं। ओवरलोड बसों में अधिक यात्री बिठाने से न केवल दुर्घटना का जोखिम बढ़ता है, बल्कि इन बसों में आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का भी कोई रास्ता नहीं होता। हैरानी की बात तो यह है कि इसको लेकर परिवहन विभाग भी बेखबर है। दरअसल, सलूणी-संघणी, लंगेरा, हिमगिरी रूटों पर बसें इतनी ओवरलोड होकर जा रही हैं कि सवारियां दरवाजे पर ही लटकी रहती है। जबकि, परिवहन विभाग ने बसों में ओवरलोड पर जुर्माने और लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान रखा है।
उसके बाद भी चालक और परिचालक क्षमता से अधिक सवारियां बैठा रहे हैं, जो कि, यात्रियों पर कभी भारी पड़ सकती है। चालक और परिचालक ओवरलोडिंग अकसर व्यापारिक लाभ के लिए कर रहे हैं। इससे बस संचालकों को अधिक यात्री मिले और अधिक मुनाफा हो सके। लेकिन, इसके परिणामस्वरूप यात्रियों की जान और सुरक्षा पर संकट आ सकता है। ओवरलोड बसों में ब्रेक की कार्यक्षमता, संतुलन और गति पर असर पड़ता है, जिससे हादसों की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे में परिवहन विभाग को इस दिशा में कड़ी निगरानी और सख्त नियम लागू करने की आवश्यकता है। ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, बसों के संचालन में मानकों का पालन करने और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। इतना ही नहीं, बीते माह बस में ओवरलोड पर विभाग 30,000 रुपये का जुर्माना ठोंका था। उसके बाद भी निजी बसों में ओवरलोडिंग की जा रही है।
यह मामला ध्यान में लाया गया है। अगर, बसों में ओवरलोडिंग हो रही है तो जुर्माना किया जाएगा। इसकी पूरी जांच की जाएगी।
राम प्रकाश, आरटीओ, परिवहन विभाग