भरमौर (चंबा)। बन्नी माता रविवार को पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार अपने मूल स्थान छड़ोला के लिए प्रस्थान कर गईं। इस पावन मौके पर सैकड़ों भक्त मौजूद रहे। सुबह 10:00 बजे बन्नी माता के चेले से भक्तों ने जातर को ले जाने की अनुमति मांगी। रविवार को बन्नी माता का पड़ाव लियूंडी में हुआ। सोमवार शाम को जातर कातैड़ में पहुंचेगी जहां पर रात्रि ठहराव होगा। मंगलवार को माता सुबह 10:00 बजे अपने मूल स्थान छड़ोला पहुंचेंगी। तीन दिन के पैदल सफर के दौरान किसी प्रकार की गंदगी या छूत का विशेष ध्यान रखा जाता है। जातर में खासतौर पर महिलाएं जवैड़ नाले तक ही जा पाती हैं। इससे आगे महिलाओं को जाने की अनुमति नहीं होती है।
तीन माह तक छड़ोला में निवास करने के बाद बन्नी माता बन्नी गांव लौटेंगी। माता तब वापस लौटती हैं जब लाहौल स्पीति से भेड़ पालकों का धन वापस कातैड़ पंहुचता है। उसके बाद माता के गूर छड़ोला से मां को वापस ले आते हैं। रविवार को जब माता छड़ोला के लिए प्रस्थान कर रही थीं तो काफी दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचे थे। इसमें कई भक्त माता की जातर के साथ छड़ोला के लिए रवाना हो गए। मंदिर के पुजारी और मुख्य गूर सुंदर कुमार, रूप लाल, माछू राम और तिलक ने बताया कि हर साल माता तीन माह के लिए छड़ोसा जाती हैं। छड़ोला पहुंचने पर मां का स्नान और पूजा की जाती है। इसके बाद माता अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इस मौके पर भरमौर-पांगी के विधायक डाॅक्टर जनक राज विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने मंदिर परिसर के साथ महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय बनवाने के लिए विधायक निधि से राशि देने की घोषणा की। इसके लिए पंचायत प्रधान को प्रस्ताव बनाने के लिए कहा। वहीं मंदिर को जाने वाले रास्ते की हालत को भी सुधारने के लिए प्रस्ताव बनाने को कहा।