चंबा। जनजातीय क्षेत्र की पांगी घाटी की बंजर जमीन ईरान और अफगानिस्तान के हींग की खुशबू से महक उठेगी। घाटी के किसान इसकी खेती कर अपनी आर्थिकी सुदृढ़ करेंगे।
इसके लिए कृषि विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। घाटी में हींग की खेती को बढ़ावा देने की कवायद शुरू हो गई है। किसानों को विभाग हींग के पौधे वितरित करेगा। इनका किसी भी प्रकार का शुल्क किसानों को नहीं देना पड़ेगा। विभाग ने फील्ड से डिमांड मांगी है। फरवरी में हींग के पौधे किसानों को वितरित किए जाएंगे। विभाग ने इसके लिए मापदंड तय किए हैं। किसानों को 30 से 50 पौधे वितरित किए जाएंगे। इसके लिए किसानों को कृषि विभाग के किलाड़ स्थित कार्यालय में पंजीकरण करवाना होगा। यहां किसानों की मांग के मुताबिक आवंटन किया जाएगा। कृषि विभाग का इस तरह की पहल करने का मकसद किसानों की आर्थिकी में सुधार करना है।
जानकारी के अनुसार इस फसल की अवधि पांच साल रहती है। विभाग ने दो हजार पौधे मंगवाए हैं। इनकी आपूर्ति घाटी में हो चुकी है। विभाग अब फरवरी माह में पौधों का आवंटन करेगा। इसके लिए किसानों को पहले पंजीकरण करवाना होगा। पौधे निशुल्क दिए जाएंगे। किसी प्रकार का शुल्क विभाग की ओर से नहीं लिया जाएगा।
घाटी में काफी जमीन बंजर है। इस बंजर भूमि का प्रयोग खेती में किया जाएगा। इसके लिए विभाग स्थानीय किसानों को प्रेरित कर रहा है। साथ ही अब यहां हींग की खेती को प्राथमिकता दी जाएगी। यहां का वातावरण हींग की खेती के लिए अनुकूल है। इसलिए विभाग किसानों को इसके लिए प्रेरित कर रहा है। बहरहाल, फरवरी में पौधों का आवंटन शुरू होगा। दूसरी तरफ घाटी हींग की खेती से महकेगी।
कृषि विकास अधिकारी पांगी नरेश कुमार नायक ने बताया कि कृषि विभाग घाटी में हींग की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। किसानों को विभाग निशुल्क हींग के पौधे फरवरी में वितरित करेगा।