साहो (चंबा)। मैदान तपने के साथ पड़ोसी राज्य पंजाब से जिले के जनजातीय क्षेत्रों के भेड़पालक पशु धन के साथ पहाड़ी इलाकों का रुख करने लगे हैं।
मैदानी इलाकों में गर्मी बढ़ने के साथ चारे का संकट हो जाता है। ऐसे में मवेशी पालक हर वर्ष पशुधन के साथ पहाड़ों का रुख करते हैं। रास्ते में उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों से दो-चार होना पड़ता है।
भेड़पालक पशुधन के साथ सर्दियां शुरू होने के साथ ही मैदानी इलाकों का रुख करते हैं। पहाड़ों पर भारी बर्फबारी की वजह से यहां पशुओं के लिए घास की व्यवस्था नहीं हो पाती है। मैदानी इलाकों में छह माह तक रहने के बाद भेड़पालक पशुधन के साथ मैदानी इलाकों से धारों की तरफ पलायन कर ऊंची पहाड़ियों की चोटियां को पार कर अपने घर पहुंच जाते हैं। ये भेड़ पालक जब एक तरफ से दूसरी तरफ पलायन कर रहे होते हैं तो उस वक्त उन्हें सड़कों से होकर ही आवाजाही करनी पड़ती है। इस वजह से इन्हें रास्ते में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मवेशी पालकों को सड़कों पर अपने पशुधन को हादसों को शिकार होने, वन विभाग के पौधों को पशुधन से बचाने, जंगली जानवरों से पशुधन को बचाने समेत अज्ञात चोरों से भी पशुधन को बचाना पड़ता है। भेड़पालकों ने सरकार से मांग उठाई है कि भेड़पालकों के पलायन के दौरान उनकी भेड़-बकरियों के लिए दवाइयां की पूरी व्यवस्था की जाए। जहां-जहां पर पड़ाव लगते हैं, वहां सरकार की ओर से शेड लगाए जाएं। इससे उस जगह रात के समय कोई भी भेड़पालक रुक सकता है।