धनछौह से जमाडू पर बने पैदल पुल से आवाजाही करते श्रद्धालु: जागरूक पाठक
होली (चंबा)। उत्तर भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा के लिए श्रद्धालु भरमौर से होकर यात्रा कर रहे हैं। कलाह गांव से भी मणिमहेश के लिए ट्रैक है। इस रास्ते से भी हर साल यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
इस साल करीब तीन हजार श्रद्धालुओं ने इस रास्ते से आवाजाही कर पवित्र मणिमहेश डल झील में डुबकी लगाई है। यह पिछले साल की अपेक्षा काफी ज्यादा है। इस बार इस रास्ते पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लंगर और रहने की भी व्यवस्था की गई है। विभिन्न पड़ावों पर चिकित्सीय सेवा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। यह ट्रैक भी अब मणिमहेश यात्रियों की पसंद बनता जा रहा है।
भरमौर से वाया हड़सर यात्रा करने के लिए यात्रियों को 13 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इस ट्रैक के मुकाबले कलाह से मणिमहेश की दूरी एक किलोमीटर कम है। 12 किमी की दूर तय कर यात्री कलाह से मणिमहेश पहुंच रहे हैं। इसके लिए श्रद्धालुओं को त्यारी पुल से गुजरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों में सुरेंद्र सिंह, मोहन सिंह, राकेश कुमार और अमित कुमार ने बताया कि इस बार वाया कलाह काफी संख्या में लोगों ने मणिमहेश के लिए आवाजाही की है। बताया कि त्यारी स्थित लकड़ी के पुल से होकर लोगों को गुजरना पड़ता है। बताया कि अगर यहां पक्के पुल का निर्माण होता है तो काफी सुविधा मिलेगी। साथ ही यात्रियों की संख्या भी इस ट्रैक से बढ़ेगी।
यह है पड़ाव
गांव कलाह से यात्रा शुरू होती है। पहला पड़वा बाबे की गुफा, इसके बाद श्रद्धालु भखोली कुड पहुंचते हैं। जहां लंगर की व्यवस्था है। इसके बाद ध्रमड़ गोठ, जैल खड्ड, सुख डली, जोत और उसके बाद डल झील आती है। होली सहित प्रदेश के अन्य जिला कांगड़ा, मंडी के लोग भी इसी रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं।
मुख्य अरण्यपाल चंबा अभिलाष दामोदरन ने बताया कि वन विभाग श्रद्धालुओं को वाया कलाह भेज रहा है। इस रास्ते पर जगह-जगह लंगर समितियों ने भंडारे लगाए हैं। इस रास्ते से 12 किलोमीटर की दूरी तय कर श्रद्धालु मणिमहेश पहुंच रहे हैं।