फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chamba News: तलाक के बाद महिला का पूर्व पति पर नहीं कोई अधिकार

Mon, 12 Jan 2026 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
विज्ञापन
विज्ञापन
चंबा। न्यायालय में तलाक लेने के बाद एक महिला की ओर से गुजारा भत्ते और पत्नी होने के दावे को लेकर व्यक्ति के खिलाफ न्यायालय में याचिका लगाने का मामला सामने आया है। इस मामले में परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश प्रीति ठाकुर की अदालत ने महिला की याचिका खारिज करते हुए पुन: दावा न करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने साफ किया कि तलाक के बाद महिला का पूर्व पति पर कोई अधिकार नहीं है।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार 7 नवंबर 2012 को विशेष समुदाय के रीति-रिवाजों से महिला और व्यक्ति का विवाह हुआ। दोनों लगभग एक वर्ष तक पति-पत्नी के रूप में साथ रहे, लेकिन इस विवाह से कोई संतान उत्पन्न नहीं हुई। मई 2013 में महिला ने अपना ससुराल छोड़ दिया और अपने मायके में रहने लगी।
इसके बाद वर्ष 2014 में व्यक्ति के विरुद्ध धारा 125 सीआरपीसी और घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत भरण-पोषण के लिए दो याचिकाएं जेएमआईसी डलहौजी में दायर की। जिन पर जेएमआईसी डलहौजी ने 31 मार्च 2016 निर्णय लिया।
विज्ञापन

इसके बाद जेएमआईसी डलहौजी के पारित आदेश से असंतुष्ट होकर महिला ने धारा 125 सीआरपीसी के तहत अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंबा के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की। जहां दोनों ने मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया और आपसी सहमति से अपने विवाह को भंग करने पर सहमति बनी।
महिला ने 23 जून 2017 को तलाकनामा पर हस्ताक्षर करने से पहले व्यक्ति से हक मेहर के रूप में नौ लाख रुपये और एकमुश्त भविष्य का गुजारा भत्ता भी प्राप्त कर लिया।
दोनों पक्षों का विवाह आपसी तलाक के समझौते से 23 जून 2017 को समाप्त हुआ। अगस्त 2018 के अंतिम सप्ताह में महिला ने व्यक्ति की पत्नी होने का दावा करना शुरू कर दिया। न्यायालय में फिर से पहुंचे मामले में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से विवाह और बाद में आपसी सहमति से तलाक होने पर उनका विवाह समाप्त किया गया। साथ ही महिला को निर्देश दिए कि वह तलाक के बाद व्यक्ति की पत्नी नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें