चंबा। जंगल की आग से प्रभावित फलदार पेड़ों को बचाने और उन्हें जल्दी ठीक करने के लिए उद्यान विभाग ने बागवानों को विशेष सलाह दी है। विशेषज्ञों ने कहा कि आग से जले पेड़ों की मुरझाई शाखाओं, पत्तियों और तनों को काटकर तुरंत हटा दें, ताकि संक्रमण को रोका जा सके। कटे हुए हिस्सों पर नीम का तेल लगाकर संक्रमण से बचाव करें।
उद्यान विभाग ने मिट्टी की पोषण क्षमता बढ़ाने के लिए कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद का उपयोग करने की सलाह दी है। आग के प्रभाव से जड़ों को नमी प्रदान करने के लिए पेड़ों को नियमित रूप से पानी दें और मल्च का उपयोग करें। ड्रिप सिंचाई प्रणाली से जड़ों तक पानी पहुंचाना अधिक प्रभावी होगा।
पेड़ों की स्थिति की नियमित निगरानी करते हुए, नए पत्तों और शाखाओं के विकास पर ध्यान दें। यदि पेड़ की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो विशेषज्ञों से परामर्श लें। गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पेड़ों को हटाकर नए पौधे लगाना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
आग की घटनाओं से बढ़ी बागवानों की चिंता**
बीते दिनों चुराह परिक्षेत्र में कई सेब के पेड़ आग की चपेट में आ गए, जिससे बागवानों को भारी नुकसान हुआ है। पहले ही मौसम की मार झेल रहे बागवान अब आग की बढ़ती घटनाओं से परेशान हैं। उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने कहा कि आग से प्रभावित बगीचों की जानकारी मिली है, हालांकि नुकसान की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। विभाग ने बागवानों को एडवाइजरी जारी करते हुए पेड़ों की देखभाल और सुधार के लिए निर्देश दिए हैं।