चंबा। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी निखिल अग्रवाल की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में आरोपियों को 30-30 हजार रुपये के जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया है।
याचिका में शिकायतकर्ता राज कुमार निवासी भरमौर ने बताया कि राजीव और मनीष बैंकिंग व्यवसाय में लगे हैं। वे विभिन्न योजनाओं में जनता से जमा राशि आमंत्रित करते थे और उनकी जमा राशि ब्याज सहित लौटाते थे। आरोपी ने बताया कि उनके पिता रत्न चंद ने साढ़े पांच साल की अवधि के लिए उनके साथ 50,000 रुपये की राशि का निवेश किया और पांच साल के बाद अनुमानित रिटर्न मूल्य केवल 1,00,000 रुपये था। आरोपियों ने शिकायतकर्ता के पिता को 11 मई 2013 को रसीद संख्या 1257 जारी की। शिकायतकर्ता के पिता की मृत्यु 23 फरवरी 2017 को हो गई और शिकायतकर्ता रत्न चंद के कानूनी उत्तराधिकारियों में से एक है। परिपक्वता पर आरोपी ने 2 सितंबर 2019 का चेक संख्या 317489 जारी किया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने कंपनी के खाता संख्या 0768002100004143 पर पंजाब नेशनल बैंक लुभ (कांगड़ा) से 1,00,000 रुपये निकाल लिए। इस कारण बैंक में बैलेंस शून्य रह गया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पैसे निकालने के लिए चेक बैंक में लगाया तो उसे अस्वीकार कर दिया गया। उन्हें बताया गया कि खाते में पर्याप्त रुपये नहीं हैं। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 19 मार्च को वकील के माध्यम से उक्त व्यक्तियों को कानूनी नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर भुगतान को चेताया गया लेकिन समय बीतने के बाद भी आरोपियों ने पैसों का भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायत कर्ता ने न्यायालय में याचिका लगाई। याचिका के तहत तमाम सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए आरोपियों को 30-30 हजार रुपये जमानती बांड भरवा कर रिहा कर दिया। संवाद