चंबा। सरकारी स्कूलों में स्वच्छ जल पिलाने के दावे भी खोखले साबित हुए हैं। कुछेक सरकारी स्कूलों में अभी तक एक्वागार्ड नहीं लग पाए है। इस कारण बच्चे टंकियों का पीना पीकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। एक्वागार्ड लगने के बाद बच्चों को पीने के लिए स्वच्छ जल मिलना था। इससे बच्चों को बीमारी की चपेट में आने की संभावना में कमी होनी थी। लेकिन, स्कूलों में एक्वागार्ड ही नहीं लग पाए।
सूत्रों के अनुसार 378 के करीब स्कूलों में एक्वागार्ड लगने थे, लेकिन अभी तक 200 के करीब स्कूलों में ही एक्वागार्ड लग पाए हैं। इस वजह से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों को स्वच्छ जल पीने को नहीं मिल रहा है। अभी भी 178 के करीब स्कूलों में एक्वागार्ड नहीं लग पाए है। एक्वागार्ड न लगने के कारण बच्चे स्कूलों में रखी पानी की टंकियों से पानी पी अपनी प्यास बुझा रहे हैं। स्कूलों में एक्वागार्ड लगाने की जिम्मेवारी आईपीएच विभाग की थी। स्कूलों में एक्वागार्ड लगाने की मुहिम लंबे समय से चल रही है। टंकियों का गंदा पानी पीकर बच्चे पेट की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। स्कूलों में पढा़ई कर रहे बच्चों को स्वच्छ जल पिलाने के उद्देश्य से एक्वागार्ड लगाने की योजना चला गई थी।
उधर, इस संबंध में आईपीएच विभाग के एससी एनडी वैद्य ने बताया कि 378 के करीब स्कूलों में एक्वागार्ड लगने थे। इसमें से आईपीएच ने 200 स्कूलों में एक्वागार्ड लगा दिए गए है। उन्होंने कहा कि शेष स्कूलों में आचार संहिता समाप्त होने के बाद एक्वागार्ड लगाए जाएंगे। एक्वागार्ड लगने के बाद बच्चों को पीने के लिए स्वच्छ जल मिलेगा।