चंबा। जेबीटी प्रशिक्षित संघ चंबा की क्रमिक भूख हड़ताल छठे दिन में प्रवेश कर गई है। प्रदेश भर में जेबीटी प्रशिक्षित बिना टेट टेस्ट के नियुक्ति की मांग को लेकर अनशन पर हैं। यह आंदोलन प्रदेश एवं समस्त अध्यापक वर्ग के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है। संघ के उपाध्यक्ष त्रिलोक सिंह ने कहा कि सरकार एवं शिक्षा विभाग के निदेशक राजीव शर्मा जिस तरीके से गलत नीतियों को प्रयोग में ला रहे हैं। यह समस्त अध्यापक वर्ग एवं स्कूलाें में पढ़ रहे गरीब छात्रों को सीधे तौर पर अज्ञानता के अंधेरे में धकेलने के समान है। सचिव सुनील कुमार ने कहा कि प्रशिक्षित वर्ग ने सरकार के जेबीटी बैच 2008-10 के प्रति सौतेले व्यवहार पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि अधिकारियों की ओर से जिस तरीके से अपनी मर्जी के निर्णय जनता पर थोपे जा रहे हैं। उससे ऐसा लगता है कि सरकार का अधिकारी वर्ग पर बिलकुल भी नियंत्रण नहीं रहा है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक एक तानाशाह की तरह अपने निर्णय प्रशिक्षितों एवं समस्त अध्यापक वर्ग पर थोप रहे हैं। उन्हाेंने कहा कि पांच पूर्व सैनिकों को नियुक्ति बिना टेट के दी जा चुकी है। उन्होंने भी उनके साथ ही टेस्ट पास किया। उन्हाेंने कहा कि प्रशिक्षिताें को टेट देने की प्रक्रिया से गुजरने को कहा जा रहा है। यह न्यायोचित नहीं है। संघ टेट को किसी भी सूरत से स्वीकार नहीं करेगा। संघ को चाहे आमरण अनशन जैसा कठोर कदम ही क्यों न उठाना पड़े। उन्हाेंने कहा कि इस समय प्रदेश में सोलन, मंडी, कांगड़ा, कुल्लू और चंबा में अपनी मांगों को लेकर क्रमिक अनशन चलाया जा रहा है। शीघ्र ही शिमला, बिलासपुर, हमीरपुर एवं ऊना में भी क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। टेट में छूट का मामला राज्य सरकार का है न कि केंद्र सरकार का। उन्हाेंने कहा कि स्कूल में भवन बनाने, मुफ्त वर्दियां बांटने या स्कूलों में खिचड़ी खिलाने से शिक्षा में गुणवत्ता नहीं आती है। शिक्षा में गुणवत्ता स्कूलों में प्रशिक्षित अध्यापकाें की नियुक्ति करने से आएगी। यदि सरकार ने जल्द टेट के निर्णय को वापस लेकर शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं को प्रदेश स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सरकार एवं शिक्षा विभाग की होगी।