चंबा। 84 साल पहले चंबा के राजा के नाम पर बनाई गई भूरि सिंह पेयजल योजना आज भी शहरवासियों की प्यास बुझा रही है।
सन 1939 में इस पेयजल योजना का निर्माण चंबा शहर में पेयजल किल्लत को दूर करने के उद्देश्य से किया गया था। योजना के तहत पानी को स्टोर करने के लिए दो लाख लीटर की क्षमता का भंडारण टैंक बनाया गया था। यहां से शहर वासियों को पीने का पानी दिया जाता है। शहर की 20,000 की आबादी इस योजना से लाभान्वित हो रही है।
ऐसे में रियासत काल में चंबा के लोगों को पानी की समस्या का समाधान करने को लेकर राजाओं की दूरदर्शी सोच थी। इसका प्रमाण आज भी चंबा में देखने को मिलता है। मान्यता है कि जब पूरा चंबा शहर पानी की किल्लत से जूझ रहा था तो चंबा की रानी से समाधि लेकर चंबा के लोगों की प्यास बुझाई थी। उन्हें सपना आया था कि चंबा में पानी की किल्लत तभी दूर होगी, जब राज परिवार में से किसी की बलि चढ़ेगी। चंबा के लोगों की प्यास बुझाने के लिए रानी सुनयना ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था।
जिले के विभिन्न इलाकों में करोड़ों रुपये की लागत से पेयजल योजनाओं का निर्माण किया गया है। यहां कुछ वर्षों बाद पानी की समस्या देखने को मिलती है। 84 वर्ष पहले जिस पेयजल योजना का निर्माण शहर वासियों की प्यास बुझाने के लिए किया गया था, उस पेयजल योजना से संबंधित समस्या कभी देखने को नहीं मिली। इससे पता चलता है कि उस समय भविष्य को ध्यान में रखकर पेयजल योजना का निर्माण किया गया था।
जल शक्ति विभाग के सहायक अभियंता दीपक भारद्वाज ने बताया कि सन 1939 में भूरि सिंह पेयजल योजना का निर्माण किया गया था। यह पेयजल योजना आज भी शहर के लोगों की प्यास बुझा रही है। इसमें पानी को स्टोर करने के लिए दो लाख लीटर की क्षमता वाला भंडारण टैंक भी बना है।