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तीसा में ग्रामीण बंदरों के आतंक से किसान परेशान

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अमर उजाला ब्यूरो

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तीसा (चंबा)। उपमंडल तीसा में किसान बंदरों के आतंक से परेशान हैं। क्षेत्र में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिस वजह से किसानों को अपनी फसलें बचाना मुश्किल हो गया है। हालत यह है कि कई किसानों ने तो खेतीबाड़ी तक करना छोड़ दिया है। किसानों ने बताया कि अब बंदरों से उनके लिए किसानों को मक्की समेत अन्य फसलों को बचाना मुश्किल हो गया है। किसान रमेश कुमार, भाग सिंह, बुधिया राम, चैन लाल, नरेंद्र, हरिलाल, चमन लाल, पवन कुमार, चुनी लाल, रविंद्र कुमार, हरीश कुमार, हरदयाल और विपिन कुमार सहित अन्य किसानों का कहना है कि दूसरे क्षेत्र से बंदर पकड़कर सेई पुल नरवाड़ नाले तीसा पुल सहित अन्य स्थानों पर छोड़े जा रहे हैं। इससे पिछले कुछ समय में इनकी संख्या तीन गुना बढ़ गई है।

तीसा क्षेत्र में इस समय मक्की की फसल उगाई गई है। मगर अब इसे बचाना किसानों के लिए मुश्किल हो गया है। इस वजह से किसानों के दिनरात खेतों में फसलों की रखवाली में ही गुजर जाता है। मगर रखवाली करते हुए घर में कुछ जरूरी काम पड़ जाए तो पीछे बंदरों की टोलियां फसल को पूरी तरह से तबाह कर देती है।
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चुराह के ग्रामीण अधिकतर खेती पर निर्भर हैं। मगर बंदरों की बढ़ती संख्या और आतंक से किसानों को फसलें बचाना मुश्किल हो रहा है। बंदर राहगीरों पर झपट पड़ते हैं। अगर राहगीर ने हाथ में थैला पकड़ा होता है तो उसे छीनकर ले जाते हैं, इससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों में भी डर का माहौल है। किसानों और बागवानों समेत अभिभावकों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें बंदरों की समस्या से निजात दिलाई जाए और उन्हें पकड़कर किसी दूर-दराज के जंगलों में छोड़ा जाए।
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बजट मुहैया होने पर दूसरी जगह छोड़े जाएंगे बंदर : जोगेंद्र सिंह
वन परिक्षेत्र अधिकारी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि बाहर से कोई भी बंदर क्षेत्र में नहीं लाया जा रहा है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा, बंदरों को पकड़कर किसी दूर-दराज के जंगल में छोड़ा जाएगा।

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