चंबा। ऐतिहासिक चंबा चौगान नंबर एक में ही मिंजर मेला 2018 का आयोजन किया जाएगा। मंगलवार को उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को चंबा चौगान में ही मिंजर मेले के आयोजन को लेकर दी गई अर्जी को स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया है। ऐसे में चंबा चौगान और अन्य जगह पर मिंजर मेले के आयोजन को लेकर चली आ रही संशय की स्थिति साफ हो गई है।
चंबा चौगान नंबर एक में मिंजर मेले के आयोजन को मिलने वाली स्वीकृति के बाद जिला प्रशासन ने अपने स्तर पर मेले की तैयारियां शुरू कर दी है। गौरतलब हो कि मिंजर मेला 2018 का आयोजन इस वर्ष 29 जुलाई से लेकर 5 अगस्त 2018 तक (श्रावण मास के दूसरे रविवार से लेकर अगले रविवार तक) आयोजित किया जाएगा। मिंजर मेले के चंबा चौगान नंबर एक में और अन्य जगह पर आयोजित किए जाने को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति ही बनी हुई थी। इसको देखते हुए जिलाधीश चंबा ने मिंजर मेले का आयोजन चंबा चौगान में ही करवाए जाने को लेकर माननीय न्यायालय में अर्जी भी दी थी।
बावजूद इसके मिंजर मेले की दूसरी बैठक तक इस विषय पर स्थिति साफ नहीं हो पाई थी कि इस मर्तबा आखिरकार मिंजर मेला चंबा चौगान में होगा या फिर किसी अन्य जगह पर। वहीं, जिला प्रशासन ने मिंजर मेले की दूसरी बैठक के दौरान ही मिंजर मेले के सफल आयोजन को लेकर गठित की गई विभिन्न समितियों को आगे कमेटियां गठित कर तैयारियों को आरंभ करने बारे निर्देश भी जारी किए गए थे। इस बैठक के दौरान सदर विधायक पवन नैयर ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी चंबा चौगान में ही मिंजर मेले के आयोजन संबंधी बात करने का आश्वासन दिया था।
सदर विधायक पवन नैयर ने बताया कि उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से चंबा चौगान में ही मिंजर मेला आयोजित करवाए जाने संबंधी बात की थी। मुख्यमंत्री को बताया कि मिंजर मेला जिले के लोगों की भावनाओं के साथ जुड़ा है। ऐसे में चंबा चौगान के अलावा कहीं और मेले का आयोजन न्यायोचित नहीं होगा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने चंबा के चौगान में ही मिंजर मेले के आयोजन को लेकर अपने तरफ से भी सहयोग किया। इसका परिणाम है कि माननीय न्यायालय से भी चौगान नंबर एक में ही मिंजर मेला आयोजित करने की स्वीकृति प्रदान की है।
न्यायालय से मिली 15 दिनों की अनुमति : हरीकेश मीणा
जिलाधीश चंबा हरीकेश मीणा ने बताया कि माननीय न्यायालय से चंबा चौगान नंबर एक में ही मिंजर मेला करवाने संबंधी अनुमति मिल गई है। उन्होंने कहा कि मिंजर मेले के लिए 15 दिनों की अनुमति न्यायालय से मिली है।