चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी में स्थित ऐतिहासिक मिंधल माता मंदिर के कपाट तीन महीने के बाद रविवार को खुलेंगे। कपाट खुलने के बाद मंदिर में माता के चेल विशेष पूजा अर्चना करेंगे। पूजा करने के साथ गांव में स्थित प्राकृतिक पेयजल स्रोत के पानी से माता की मूर्ति को नहलाया जाएगा। मूर्ति को नहलाने के बाद नए वस्त्र पहनाए जाएंगे। पूजा प्रक्रिया पूरी होने के बाद श्रद्धालु माता के दर्शन कर पाएंगे। तीन माह की अवधि के बाद माता के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की मंदिर में काफी भीड़ रहेगी। कपाट खुलने के बाद माता के दर्शन करने के लिए लाहुल स्पीति और जम्मू के बार्डर क्षेत्र से भी श्रद्धालु मिंधल पहुंचेंगे।
मकर संक्रांति के दिन मिंधल माता मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद हो गए थे। जोकि बैसाखी को खुलने वाले हैं। इसको लेकर पांगी घाटी के लोगों में काफी उत्साह और खुशी है। मंदिर के कपाट खुलने के बाद मंदिर में भक्तों का मेला लग जाएगा। घाटी के हरेक क्षेत्र से लोग माता के दर्शन करने के लिए पहुंचेंगे। यह सिलसिला एक दिन नहीं बल्कि कई दिनों तक चलता रहेगा। मिंधल माता मंदिर की ऐसी मान्यता है कि यहां पर सच्चे मन से मांगी जाने वाली हरेक दुआ को माता रानी पूरी करती है।
इसके चलते श्रद्धालु अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए मिंधल माता के दरबार में पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पांच सौ से अधिक सीढ़ियों को चढ़ना पड़ता है। मंदिर की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पांगी के पांच प्रजामंडलों ने विशेष व्यवस्था की है। इसमें हर प्रजामंडल के दो सदस्य रोजाना सुबह आठ बजे से लेकर अगले दिन सुबह आठ बजे तक मंदिर में मौजूद रहेंगे। मंदिर कमेटी के संयोजक मान सिंह ने बताया कि हरेक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बैसाखी को मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होगी। उन्होंने जिला वासियों से आग्रह किया है कि वह माता रानी के दर्शन करने के लिए मंदिर में उपस्थिति दर्ज करवाएं।