चंबा। हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष सरकारी कार्यालयों में 65 से 70 हजार आरटीआई आवेदन किए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश में आरटीआई के तहत सूचना प्रदान करने का कार्य समयबद्ध व दक्षतापूर्ण तरीके से किया जा रहा है। यह इस बात से इंगित होता है कि हिमाचल में आरटीआई के कुल आवेदनों में से लगभग 550 से 600 आवेदनों के लिए ही दूसरी अपील दायर की जाती है।
आरटीआई के तहत समयबद्ध सूचना प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण पर खास जोर दिया जा रहा है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत नागरिकों को समयबद्ध सूचना प्रदान करने में भारत ने पूरे विश्व में सातवां स्थान प्राप्त किया है। यह जानकारी हिप्पा के सूचना का अधिकार अधिनियम के विशेषज्ञ प्रो. आरएस कपूर ने बचत भवन चंबा में आरटीआई पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने बताया कि विश्व में 119 देशों में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू है। इन देशों में सूचना प्रदान करने में भारत सातवें स्थान पर है।
यह खुलासा स्वयंसेवी संस्था ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल के सर्वे में हुआ है। देश के लिए यह गौरवपूर्ण विषय है, क्योंकि विश्व के अन्य देशों में आरटीआई लागू करने का इतिहास 250 वर्षों से भी अधिक पुराना है। स्वीडन में आरटीआई वर्ष 1766 में ही लागू हो गया था, जबकि भारत में आरटीआई 12 अक्तूबर, 2005 को लागू हुआ था। उन्होंने बताया कि भारत में नागरिक हर वर्ष औसतन 80 लाख आरटीआई के आवेदन विभिन्न कार्यालयों में दिए जाते हैं। राज्य से लेकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं। हिप्पा के आरटीआई विशेषज्ञ आरएस कपूर का आरटीआई प्रशिक्षण और जागरूकता में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
प्रो. कपूर विदेशों के अधिकारियों को भी आरटीआई के बारे में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। अभी हाल ही में उन्होंने एनआईआरडी (पीआर) नेशनल इंस्ट्टीयूट ऑफ रुरल डेवलपमेंट (पंचायती राज) ने हैदराबाद में आयोजित 19 देशों के 26 वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। हिमाचल प्रदेश में नागरिकों को भी आरटीआई के प्रति जागरूक करने के लिए समयबद्ध जागरूकता अभियान आयोजित किए जा रहे हैं। आरटीआई के प्रति जागरूकता से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने के साथ-साथ संवेदनशीलता और कार्य दक्षता में भी बढ़ोतरी हुई है।