चंबा। उपमंडल चुराह की छह पंचायतों को स्वास्थ्य सुविधा देने वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कल्हेल चिकित्सकों और स्टाफ की कमी से खुद बीमार है। सुविधाओं की कमी से इलाके की गरीब जनता को उपचार के लिए चंबा या टांडा का रुख करना पड़ रहा है।
इलाके में चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकारी स्तर पर कोई ठोस प्रयास होते नहीं दिख रहे है। आपात काल मे यहां स्थिति और भी बदतर हो जाती है। हालत यह है कि पीएचसी कल्हेल मे आज तक एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पाई है।
अगर आपातकालीन परिस्थितियों में में एबुंलेंस (108) की जरूरत पड़ती है तो करीब 30-32 किलोमीटर तीसा से आती है। कल्हेल पीएचसी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के चलते मरीज को चंबा रेफर करना पड़ता है। कई मर्तबा मरीज समय पर आवश्यक चिकित्सीय सुविधा न मिलने से बीच राह में ही मरीज दम तोड़ जाता है। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र कल्हेल का संचालन सिर्फ एक डॉक्टर और चपरासी के सहारे चल रहा है। सरकार ने डिस्पेंसरी का दर्जा बढ़ाकर स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिया गया। मगर स्टाफ पूरा करना भूल गई। इसका खामियाजा छह पंचायतों की 15 हजार आबादी को भुगतना पड़ रहा है।
एकमात्र चिकित्सक के अवकाश पर चले जाने पर अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से डेपुटेशन करके काम चलाना पड़ता है। पीएचसी स्वास्थ्य केंद्र मे रोजाना दूर-दराज क्षेत्रों से सैकड़ों से अधिक मरीज एकमात्र चिकित्सक होने के चलते घंटों लाइन में खडे़ होकर बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
ग्रामीण लेखराज, राकेश कुमार, जगदीश कुमार, मान सिंह, राजू, दिनेश कुमार, ज्ञान सिंह राणा, देवकी देवी, मुहणी देवी, अशोक कुमार, चंपा देवी और ठाकुर दास का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं की कमी के चलते लोग निजी क्लीनिकों में उपचार करवाने को मजबूर हैं। इसका ज्यादा खामियाजा गर्भवती महिलाएं, बजुर्गों और बच्चों को भुगतना पड़ता है। घर-द्वार पीएचसी के होते हुए भीशद्द स्वास्थ्य सुविधा से महरूम हैं। सीएमओ डॉ. वाईडी शर्मा ने बताया कि लोग पहले भी शिकायत पत्र दे चुके हैं। इस बारे में कल्हेल स्वास्थ्य केन्द्र में चल रही स्टाफ की कमी की जानकारी सरकार को दे दी गई है।