चंबा। विकास खंड चंबा के तहत ग्राम पंचायत राजपुरा के किसानों का खेतीबाड़ी से मोहभंग होने लगा है। लावारिस पशुओं और बंदरों के उत्पात से परेशान अधिकतर किसानों ने जहां गेहूं की बिजाई इस साल नहीं की है, तो वहीं दूसरी तरफ जिन किसानों ने गेहूं की बिजाई की है, वो भी अब इसे घाटे का सौदा बता रहे है।
पंचायत में हालात ऐसे है कि ग्रामीणों को पूरा-पूरा दिन खेतों की रखवाली करने में बीत रहा हैं। ऐसे में ग्रामीण खेतों के चौकीदार बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस बारे वह कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके है। मगर अभी तक बंदरों की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। इस बात को लेकर किसानों में काफी रोष है।
जानकारी के अनुसार खेतों में दिन के समय जहां बंदर फसलों को चट कर रहे है तो वहीं लावारिस पशु गेेहूं को नुकसान पहुंचा रहे है। किसानों द्वारा लाभ के नजरिए से बोई गेहूं की फसल अब नुकसान के रूप में परिवर्तित होती जा रही है। किसान राजेश कुमार, उत्तम दास, सुरेश कुमार, देवेंद्र कुमार, धर्मेंद्र सिंह, राम सिंह, उमेश कुमार, भीम सैन, उत्तम कुमार, रत्न सिंह, नेक सिंह, माधो राम, कमल सिंह, राज कुमार ने बताया कि बंदरों व लावारिस पशुओं के चलते उनकी फसल को काफी नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार बंदरों और लावारिस पशुओं की समस्याओं से निजात दिलवाने के लिए कोई प्रयास करती नजर नहीं आ रही है।
इस कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की कि पंचायत में लावारिस पशुओं और बंदरों की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। जिससे उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न पेश आए।