चंबा। जिले के 36 स्कूलों में मुख्याध्यापकों ने ज्वाइंनिंग नहीं दी है। ये जेबीटी शिक्षक पदोन्नत होकर मुख्याध्यापक बने हैं। इन्होंने ज्वाइंनिंग न देने के पीछे बीमारी, वर्क ऑफ रिटायरमेंट संबंधी तर्क दिए हैं। 104 में से 68 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में मुख्याध्यापकों ने ही ज्वाइन किया है। जिसकी रिपोर्ट बाकायदा शिक्षा विभाग के पास पहुंच चुकी है।
ऐसे में पदोन्नति के बाद भी अब इन 36 जेबीटी अध्यापकों को अपने ही स्कूलों में पढ़ाना होगा। गौरतलब है कि जिले में 104 जेबीटी अध्यापकों को पदोन्नति का तोहफा देते हुए शिक्षा विभाग की ओर से उन्हें निर्धारित स्कूलों में ज्वाइंनिंग की समयावधि भी दी गई। वहीं, 104 मुख्याध्यापकों की पदोन्नति के बाद कई स्कूलों में संचालन पहले से बेहतर होने की भी आस जगी थी लेकिन 36 मुख्याध्यापकों के स्कूलों में ज्वाइन न करने से अभिभावकों की आस धरी की धरी रह गई। जिले में मुख्याध्यापकों की ओर से ज्वाइन न किए जाने वाले स्कूलों में राजकीय प्राथमिक पाठशाला घुंडेरा, भद्रोहनाला, रंडोह, गरिमा-बडेई, प्ररूंग्रा, मांधा, साली, शेरुपर, खंडियारू, भाला, फिंडपार, सकलोगा, थलोगा, औरा, कुम्हारका, थनेई, सलोह, पुखरी, मिंधल, डणून, काकरी, भंडार, उरेई, पंजसेई, भियाण, दीवानखाना, शक्तिदेहरा, लुज, करियास, कैल, चंबर, संधारा, भसुआ, छुद्रा, कैरणा और शेरपुर शामिल हैं। बहरहाल, शिक्षा विभाग ने मुख्याध्यापकों के स्कूलों में ज्वाइंनिंग न करने को लेकर अपने स्तर पर सूची तैयार कर ली है जिसे जल्द शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा।
कार्यवाहक प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक प्यार सिंह चाढ़क ने बताया कि जिला में 104 मुख्याध्यापकों में से महज 68 मुख्याध्यापकों ने ज्वाइन किया है। शेष 36 अध्यापकों ने ज्वाइनिंग न करने को लेकर अपने तर्क विभाग को लिखकर भेज दिए हैं।