चंबा। चंबा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सरकारी सेवाओं की जगह निजी स्वास्थ्य संस्थानों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हाल ही में मेडिकल कॉलेज से दो डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया है। इसमें एक डॉक्टर ने त्यागपत्र भेज दिया है कि तो वहीं दूसरे डॉक्टर ने निजी अस्पताल में सेवाएं देना शुरू कर दिया है। बिना बताए नौकरी छोड़ने वाले डॉक्टर को मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने नोटिस जारी किया है। इसके माध्यम से उससे जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही सूचना प्रदेश सरकार और मेडिकल एजूकेशन निदेशक को दे दी गई है।
संबंधित डॉक्टर को जल्द अपना जवाब देना होगा। अन्यथा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा एक और डॉक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को त्यागपत्र सौंप दिया है। इसे प्रबंधन ने स्वीकृति के लिए सरकार को भेजा है।
चंबा अस्पताल में अभी तक आधा दर्जन डॉक्टर सरकारी सेवाएं छोड़ निजी क्षेत्र में जा चुके हैं। हैरानी इस बात की है कि ऐसा करने वाले डॉक्टरों पर सरकार कोई कार्रवाई तक नहीं कर रही है। जबकि सरकार एक डॉक्टर को तैयार करने में लाखों रुपये खर्च करती है।
जब डॉक्टर सरकारी अस्पताल में नाम कमा लेता है तो वह या तो अपना निजी अस्पताल खोल लेता है, या किसी प्राईवेट अस्पताल में ज्यादा पैसे लेकर सरकारी नौकरी छोड़ देता है। यह सिलसिला चंबा में लंबे समय से चल रहा है।
इसको लेकर जनता में भारी रोष है। चंबा में मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद जिले की छह लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद जगी थी। मगर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के निजी अस्पतालों में जाने से आखिरकार मरीजों को ही परेशानी झेलनी होगी। इसलिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इस मसले में गंभीर होने की जरूरत है। आम जनता ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि सरकारी अस्पताल में नौकरी छोड़ निजी अस्पतालों में जाने वाले डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
बिना सूचना गायब डॉक्टर को जारी किया नोटिस : डॉ. ओहरी
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनिल ओहरी ने बताया कि चंबा अस्पताल के एक डॉक्टर ने नौकरी से त्यागपत्र देने के लिए आवेदन किया है। उसे सरकार को भेज दिया गया है। जबकि एक डॉक्टर बिना बताए ही लंबी छुट्टी पर चला गया है। इसकी निजी अस्पताल में सेवाएं देने की सूचना मिली है। इस बारे में डॉक्टर को नोटिस जारी किया गया है।