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चंबा मेडिकल कॉलेज में प्रसव के बाद महिला को तुरंत नहीं लगा एंटी-डी टीका

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प्रवीण कुमार
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चंबा। चंबा मेडिकल कॉलेज में सिविल सप्लाई द्वारा दवाइयां बंद करने से प्रसूति वार्ड में एक महिला को काफी परेशानी हुई। बुधवार दोपहर को अस्पताल में महिला का प्रसव हुआ। महिला व बच्चे का ब्लड ग्रुप अलग-अलग थे। बच्चे की सुरक्षा को लेकर मां को एंटी-डी का टीका लगना था। टीका अस्पताल में उपलब्ध नहीं था। टीका लेने के लिए परिजन डॉक्टर की पर्ची व स्मार्ट कार्ड लेकर सिविल सप्लाई की दुकान में गए। जहां से उन्हें बिना टीका लिए ही वापस लौटना पड़ा। इसके बाद परिजन चिकित्सा अधीक्षक के पास पहुंचे। चिकित्सा अधीक्षक ने सिविल सप्लाई इंचार्ज को फोन करके टीका देने को कहा। परंतु दुकान इंचार्ज ने टीका देने से मना कर दिया। 72 घंटों के भीतर बच्चे को यह टीका लगाना अनिवार्य होता है। अन्यथा मां का दूध पीते समय बच्चे को इन्फेक्शन भी हो सकता है। बच्चे की मौत भी हो सकती है। इस टीके की कीमत 2400 से 2800 रुपये के बीच में है। परिजन टीके को लेकर कभी सिविल सप्लाई दुकान तो कभी चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के चक्कर काटते रहे। बाद में चिकित्सा अधीक्षक ने बाजार से टीका मंगवाकर महिला को लगवाया। इससे महिला के बच्चे की जान सुरक्षित हुई। परिजन टीका खरीदने में असमर्थ थे। गर्भवती महिला के पूरे इलाज व दवाइयों का खर्च स्वास्थ्य विभाग का होता है। इसको लेकर सरकार द्वारा कई कार्यक्रम भी चलाए हैं।
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मेडिकल कॉलेज चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि सिविल सप्लाई से दवाइयां बंद होने से काफी परेशानी हुई। एक महिला को एंटी-डी का टीका बाजार से खरीद कर लगाया गया।
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