अमर उजाला ब्यूरो
साहो (चंबा)। साहो क्षेत्र में सेब के पेड़ों को वूली एफिड बीमारी ने जकड़ लिया है। यह कीड़ा पेड़ों के तनों में फंफूद पैदा करता है। फंफूद से पेड़ों का रंग सफेद हो रहा है। फंफूद के भीतर कीड़ा पेड़ को नष्ट करने का कार्य करता रहता है। इससे पेड़ का तना खोखला हो जाता है। तने के बाद कीड़ा जड़ों में घुस जाता है। अगर यह कीड़ा पेड़ की जड़ में चला जाए। तो पूरा पेड़ सूख कर नष्ट हो जाएगा। सेबों के पेड़ों में लगी इस बीमारी को लेकर इलाके के बागवान काफी चिंतित हैं। बागवानों का मुख्य व्यवसाय सेब की फसल पर ही टिका है। ऐसे में सेब के पेड़ों को इस प्रकार की बीमारी लगना बागवानों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। बागवान चतरो राम, अमर सिंह, ओम प्रकाश, चैन लाल, देवी सिंह, रूपलाल, कमल कुमार, अरविंद, देसराज, सुरेंद्र, भाग चंद और व्यास देव ने बताया कि साहो क्षेत्र में तीन दर्जन बागवान सेब की फसल पर निर्भर हैं। जोकि सेब की अच्छी फसल की पैदावार के लिए पूरा साल मेहनत करते हैं। ताकि उनकी फसल की पैदावार अच्छी हो सके। ऐसा करने के बाद भी उनकी फसल बर्बाद होती है तो उन्हें अपने परिवार का पालन पोषण करने में परेशानी उठानी पड़ सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से गुहार लगाई है कि बागवानों को इस बीमारी से बचाव के उचित तरीके बताए जाएं। ताकि बागवानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
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कृषि विज्ञान केंद्र सरू के समन्वयक डॉ. राजीव रैणा ने बताया कि अक्तूबर और नवंबर में इस बीमारी के फैलने का खतरा रहता है। इस बीमारी से पेड़ों को बचाने के लिए समय पर कीटनाशक दवाई का छिड़काव करना आवश्यक है। इसके छिड़काव से पेड़ों को बीमारी से बचाया जा सकता है।