पवित्र डल में मुंडन करवाने की रस्म को भद्रवाही मानते ही पवित्र
निसंतान दंपतियों के घरों में बच्चें की किलकारी पर अदा की जाती है रस्म
जम्मू-कश्मीर से श्रद्धालुओं की टोलियों में दर्जनों बच्चे रहते हैं शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। शिव नगरी कैलाश के प्रति भोले के भक्तों में अटूट श्रद्धा और विश्वास है। पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर से आने वाले भद्रवाही अपने बच्चों के मुंडन की रस्म भी यहां पर अदा करते हैं। इतना ही नहीं, निसंतान दंपतियों के घरों में बच्चों की किलकारी गूंजने के बाद श्रद्धानुसार भी यह रस्म निभाई जाती है। जम्मू-कश्मीर सहित जिले के अन्य जिलों से दर्जनों श्रद्धालुओं की टोलियों में दर्जनों बच्चे भी शामिल रहते हैं। कठिन परिस्थितियों में अपने बड़े-बुजुर्गों के साथ ये बच्चे भद्रवाह से लेकर पवित्र डल तक की यात्रा करते हैं।
गौरतलब हो कि मणिमहेश यात्रा और पवित्र कैलाश पर रहने वाले भोले बाबा के भगतों का शिव स्वामी के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर के भद्रवाह और डोडा समेत अन्य जिलों से अधिकाधिक संख्या में शिव भक्त पैदल दुर्गम यात्रा को करते हुए पवित्र डल में डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं। भोले के भक्तों की अटूट श्रद्धा है कि भद्रवाह, डोडा से श्रद्धालुओं के साथ उनके बच्चे भी यात्रा में शामिल होते हैं। भद्रवाह, डोडा से आने वाले श्रद्धालु बच्चों के मुंडन भी पवित्र डल में करवाते हैं। भद्रवाह से यात्रा पर आए योगेश कुमार, नरेश कुमार और संजीव कुमार का कहना है कि वह बच्चों के मुंडन करवाने के लिए पवित्र मणिमहेश यात्रा पर जा रहे हैं। इसके तहत वह अपने अगले पड़ाव चंबा चौगान में पहुंचे हैं। वहीं, डोडा निवासी दिलीप कुमार, किरपा राम और विजय कुमार का कहना है कि उनके घरों में संतान नहीं होती थी। पवित्र कैलाश पर उन्होंने मन्नत मांगी थी कि अगर उनके घरों में बच्चे की किलकारी गूंजती है तो वह उनके मुंडन पवित्र डल पर करवाएंगें। इसलिए वह इस बार यहां आए हैं।