दो साल के अभियान में स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर पहुंचकर की स्क्रीनिंग, समय रहते बीमारी की पहचान
आरोग्य शिविरों में भी सामने आए टीबी के मरीज, 1509 निक्षय मित्रों ने संभाली पोषण सहायता की जिम्मेदारी
प्रवीण कुमार
चंबा। जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए दो वर्ष के अभियान में 1873 टीबी मरीजों की पहचान की गई। विभागीय टीमों ने करीब डेढ़ लाख लोगों की जांच और स्क्रीनिंग की। इस दौरान टीबी के संभावित लक्षण वाले लोगों की जांच कर बीमारी की समय रहते पहचान की गई। अभियान सात दिसंबर 2024 से छह सितंबर 2026 तक चला।
अभियान के तहत जिले में 31922 लोगों के टीबी संबंधी परीक्षण किए गए, जबकि 65 हजार लोगों के छाती के एक्स-रे करवाए गए। मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी संभावित मरीजों की जांच की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए आरोग्य शिविरों के माध्यम से ऐसे 65 मरीज सामने आए, जिनमें टीबी की पुष्टि हुई।
मरीजों को उपचार से जोड़ने पर भी जोर
स्वास्थ्य विभाग ने केवल मरीजों की पहचान तक अभियान सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें उपचार से जोड़ने और पोषण सहायता उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया। इसके लिए जिले में 1509 निक्षय मित्र बनाए गए। इनके सहयोग से जरूरतमंद टीबी मरीजों को पोषण सामग्री और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाने का प्रयास किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इससे उपचार के दौरान राहत मिली।
लक्षण दिखने पर जांच करवाने की अपील
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लोगों को लगातार जागरूक कर रही हैं कि लंबे समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और लगातार कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सकता है और संक्रमण के फैलाव को रोकने में भी मदद मिलती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम सिंह भारद्वाज ने बताया कि अभियान के दौरान जिले में 1873 टीबी मरीजों की पहचान हुई है। जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।