चंबा। चंबा मेडिकल कॉलेज का मेडिसिन विभाग एक डॉक्टर के सहारे चल रहा है। इसकी वजह यह है कि विभाग में सेवाएं दे रहे दो डॉक्टरों ने सरकारी नौकरी छोड़ दी है जबकि तीन डॉक्टरों का सरकार ने तबादला कर दिया है। इस परिस्थिति में तीन ओपीडी में से सिर्फ एक ओपीडी में ही मरीजों की जांच हो पा रही है। इससे ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। ऐसे में मरीजों को जांच करवाने के लिए घंटों का इंतजार करना पड़जा है। डॉक्टरों न होने की वजह से दो ओपीडी में अब ताला लटका है और यहां मरीज डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहते हैं। अस्पताल में रोजाना 2000 के करीब ओपीडी रहती है।
वहीं मेडिसिन विभाग में सबसे अधिक मरीजों की संख्या रहती है। यहां एमडी मरीजों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं। मगर डॉक्टरों के अचानक खाली हुए पदों से मेडिसिन ओपीडी में अब वहां एमबीबीएस डॉक्टर की सेवाएं ली जा रही है। ऐसे में जिस ओपीडी में एमडी बैठता है, वहां पर रोजाना मरीजों की भीड़ जमा हो जाती है। इसकी वजह से मरीज घंटों इलाज के लिए कतारों में इंतजा करते हैं वहीं डॉक्टर पर भी काम का बोझ बढ़ गया है। मेडिकल कॉलेज में दूसरे सत्र में क्लीनिकल और नॉन क्लीनिकल मिलाकर 120 डॉक्टर होने चाहिए। मगर मेडिकल कॉलेज चंबा के पास वर्तमान में 103 डॉक्टर हैं। इसमें से पांच अस्पताल से जा चुके हैं।
नियमों के तहत मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में आठ एमडी डॉक्टर होने चाहिए। मगर चंबा में तैनात छह डॉक्टरों में पांच डॉक्टर जा चुके हैं। मात्र एक एमडी के कंधों पर मेडिसिन विभाग चल रहा है। ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में मेडिसिन विभाग पूरी तरह खाली हो जाएगा। इससे मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन की ओपीडी भी बंद करनी पड़ेगी। इससे मरीजों को एक बार फिर से निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।
सरकार को दे दी है जानकारी : डॉ. अनिल ओहरी
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनिल ओहरी ने बताया कि मेडिसिन विभाग के तीन डॉक्टरों का तबादला हो गया है। जबकि दो डॉक्टरों ने नौकरी से रिजाइन कर दिया है। इसके बारे में सरकार और सचिवालय को अवगत करवा दिया गया है। मामला सरकार के विचाराधीन है।