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नेताओं ने जिले को पासपोर्ट दफ्तर देने के नाम पर ठगा

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंबा। जिले को पासपोर्ट कार्यालय देने के नाम पर नेताओं ने हमेशा यहां के लोगों को ठगा है। आज भी जिले की सवा पांच लाख की आबादी को पासपोर्ट बनाने के लिए 250 से लेकर 550 किलोमीटर का सफर तय कर बाहरी जिलों का रुक करने को मजबूर हैं। हालांकि, एक वर्ष पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरेक संसदीय क्षेत्र में पासपोर्ट कार्यालय खोलने की घोषणा की थी। बावजूद इसके चंबा में पासपोर्ट कार्यालय का न खुल पाना अपने आप में कई प्रकार के सवाल खड़े करता है। सांसदों का जिला के प्रति कोई भी ध्यान न देना या फिर जिले में विकास की धारा को प्रवाहित न करवा पाना ही इसका मुख्य कारण रहा है।
देश के पिछड़े जिलों में शुमार चंबा जिला पिछड़ेपन में 115 पायदान पर है। जिले के पिछड़ेपन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चंबा के लोगों की चिर लंबित पासपोर्ट कार्यालय खोलने की मांग को आज तलक मंत्रियों और नेताओं ने अनसुना ही किया है। बहरहाल, आलम यह है कि आज भी जिले से किसी भी व्यक्ति को पासपोर्ट बनवाने के लिए 225 किलोमीटर का सफर तय कर पालमपुर, 300 किलोमीटर का सफर तय कर हमीरपुर या फिर 550 किलोमीटर का सफर तय कर राजधानी शिमला का रुख करना पड़ता है।
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जनहित संगठन चंबा के प्रधान किशोर शर्मा, उपप्रधान भगत सिंह, महासचिव शिव करण चंद्रा, संयोजक किशोर शर्मा के मुताबिक एक वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर एक संसदीय क्षेत्र में पासपोर्ट कार्यालय खोलने की घोषणा की थी। इसके उपरांत संगठन ने सांसद शांता कुमार को पत्र लिख कर पिछड़े जिला चंबा में पासपोर्ट केंद्र खोलने का आग्रह किया गया था। पत्र के जवाब में शांता कुमार ने इसके बारे में सुषमा स्वराज से बात करने का आश्वासन उन्हें दिया। बावजूद इसके बाद में चंबा के बजाए पालमपुर में पासपोर्ट केंद्र खोल कर सांसद शांता कुमार ने चंबा के लोगों के साथ छलावा ही किया है। इतना ही नहीं, पालमपुर में पासपोर्ट कार्यालय खोलने के बाद वे सांसद अनुराग के संसदीय क्षेत्र हमीरपुर में पासपोर्ट कार्यालय खोलने की पैरवी करते रहे। जबकि, उन्होंने जिला चंबा की हर हाल में बेकद्री ही की है। कहा कि आज के समय में जहां आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड अनिवार्य है तो पासपोर्ट कार्यालय चंबा में न होना चिंतनीय विषय ही बना हुआ है।
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