मैहला (चंबा)। मैहला पुल से लेकर जालपा मंदिर तक करीब आधा किलोमीटर सड़क पर बिछाई गई तारकोल थोड़े दिनों में ही उखड़ना शुरू हो गई है। लाखों रुपये की लागत से बिछाई गई तारकोल उखड़ने से क्षेत्र के लोगों में भारी रोष है। इसके साथ ही चालकों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर लोग कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि विभाग के मुताबिक नमी अधिक होने के कारण यह समस्या पेश आई है और इसको देखते हुए कार्य को भी बंद करवा दिया गया है। एक किलोमीटर सड़क पर करीब सात लाख रुपये की लागत से यह कार्य होना था। इसमें से करीब 500 मीटर सड़क पर तारकोल बिछाने का कार्य हो चुका है। जो कि थोड़े समय में ही उखड़ चुकी है।
मैहला पंचायत सहित आसपास की अन्य पंचायतों के बाशिंदे इसी मार्ग से होकर आवाजाही करते हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों की चिर लंबी मांग को ध्यान में रखते हुए बाकायदा यहां पर लोनिवि ने तारकोल बिछाने का कार्य करवाया है। हैरानी की बात तो यह है कि तारकोल बिछाने के कार्य में गुणवत्ता का कोई भी ध्यान नहीं रखा गया है।
नतीजतन, तारकोल बिछाए जाने के कुछ ही समय पूर्व अब यहां से तारकोल उखड़ना आरंभ हो गई है। मैहला पंचायत के उपप्रधान मनोज जसरोटिया, ग्रामीणों में नंदलाल, चैन सिंह, जीत सिंह, लाल चंद, मोहम्मद हुसैन, फकीर चंद, नूर मोहम्मद, राज कुमार और राजेंद्र सिंह का कहना है कि मैहला पुल से लेकर जालपा माता मंदिर तक जगह-जगह तारकोल उखड़ चुकी है। इस कारण मार्ग पर गड्ढे पड़ चुके हैं। मार्ग पर पड़े गड्ढों के चलते मार्ग से होकर गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लोनिवि के सहायक अभियंता ठाकुर सिंह उत्तम ने बताया कि मैहला पुल से लेकर जालपा मंदिर तक करीब सात लाख की राशि से स्वीकृत एक किलोमीटर मार्ग पर केवल 500 मीटर तक तारकोल बिछाई गई है। उन्होंने कहा कि जमीन में नमी अधिक होने से बीते दो सप्ताह से तारकोल डलवाने का कार्य बंद कर दिया गया है। मौसम के खुलते ही मार्ग पर तारकोल डाली जा सकती है।