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मां गौरी ने भगवान शंकर को पाने के लिए किया था यहां तप

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manimahesh - फोटो : demo pic
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अमर उजाला ब्यूरो

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भरमौर(चंबा)। मणिमहेश यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव गौरी कुंड को माना जाता है। गौरी कुंड पड़ाव पर मां गौरी ने भगवान शंकर को पाने की चाह में कठोर साधना और तप किया था। इस कुंड की विशेषता यह है कि गौरी कुंड में पुरुषों के स्नान करने की पूर्ण रूप से मनाही ही है। इसके अलावा सच्ची श्रद्धा, लग्न और विश्वास से पूजा-अर्चना करने वाली विवाहिताएं पति की लंबी उम्र और युवतियां मनचाहे वर की कामना को लेकर सुहागी अर्पित करती है। गौरी कुंड समुद्रतल से 12 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।


गौरतलब हो कि पवित्र मणिमहेश यात्रा के विभिन्न पड़ाव महत्वपूर्ण रहस्यों और जानकारियों से भरे पड़े हैं। यात्रा के तहत पड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव गौरी कुंड उसमें से एक है। यहां से पवित्र कैलाश के दर्शन करने का मौका मिलता है, दूसरी और गौरीकुंड के बारे में मान्यता है यहां पर केवल स्त्रियां ही स्नान कर सकती है।
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इसके साथ ही यहां पर पूजा-अर्चना भी करती हैं। इसके अलावा सच्चे मन, श्रद्घा से पूजा-अर्चना करने वालों की मां गौरी हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। गौरीकुंड के बारे में बनारस के महंत महाकाल गिरी बताया कि गौरी कुंड पर ऐसे कई सिद्ध पुरूष दिखाई देते है जो आज भी मां की भक्ति में लीन है। गौरीकुंड के बारे में मान्यता है कि सच्ची श्रद्घा से स्त्रियां और युवतियों जो वरदान मागंती है वो अवश्य पूरा होता है। पंडित हरिशरण और पंडित लक्ष्मण दत्त यह एक अलौकिक स्थान है।

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