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जन औषधि केंद्र में ब्रांडेड दवाइयों के नाम पर अवैध वसूली

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Drugs - फोटो : demo pics
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प्रवीण कुमार

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चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में जन औषधि केंद्र में जेनेरिक दवाओं के नाम पर महंगी ब्रांडेड दवाईयां बेचकर मरीजों को लूटा जा रहा है। हैरानी इस बात की है कि यहां सिविल सप्लाई से भी अधिक दामों पर दवाइयां और अन्य सामान बेचा जा रहा है। इस तरह से मरीजों से जन औषधि केंद्र के नाम पर मरीजों से अवैध वसूली की जा रही है। इसके लिए बिना बिल के दवादयां मरीजों को थमाई जा रही है या फिर हाथ से बिल काटा जा रहा है। यह सारी कारगुजारी अस्पताल प्रबंधन के नाक तले हो रही है। हैरानी बात है कि अस्पताल प्रबंधन कार्रवाई करने की बजाए आंखें मूंदे बैठा है।

इसका खामियाजा जिले की साढ़े पांच लाख की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। जिले की आबादी बीमारी के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज पर ही निर्भर है। यहां पर मरीजों की सुविधा के लिए स्थापित जन औषधि केंद्र में जेनेरिक और सस्ती दवाओं के नाम पर ब्रांडेड और महंगी दवाएं मरीजों को बेची जा रही है। इतना ही नहीं दवाओं की खरीद पर मरीजों को बिल तक नहीं दिए जा रहे हैं।
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जन औषधि केंद्र से तीमारदार ने स्पाइनल नीडल खरीदी। इसके लिए जनऔषधि केेंद्र में 90 रुपये वसूले गए। जबकि इसी स्पाइनल नीडल को सिविल सप्लाई में तीमारदार ने 67 रुपये में खरीदा।

इतना ही नहीं जब तीमारदार जन औषधि केंद्र में बिल नहीं मांगते तो 90 रुपये में बेची जाती है जबकि हाथ से बिल लिखकर स्पाइनल नीडल के 100 रुपये वसूले जा रहे हैं। इसी तरह से अन्य दवाइयों के भी यहां पर सिविल सप्लाई की दुकान से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं।

कुल मिलाकर अस्पताल में सस्ती दवाइयों के नाम पर मरीजों से धोखा हो रहा है। जबकि केंद्र सरकार ने मरीजों को सस्ती दरों पर दवाइयां उपलब्ध करवाने के लिए हर अस्पताल में जनऔषधि केंद्र खोले हैं।

मगर चंबा मेडिकल कॉलेज में जन औषधि केंद्र में मरीजों को सस्ती दवाएं नहीं बल्कि महंगी और ब्रांडेड दवाएं बेची जा रही हैं। स्पाइनल नीडल की तरह केंद्र में कई ओर ऐसी ब्रांडेड दवाएं हैं। जोकि बिना अनुमति बेची जा रही हैं। जबकि केंद्र में मात्र जेनेरिक और सस्ती दवाइयां बेची जा सकती हैं।

तीमारदारों ने सरकार और प्रशासन से कार्रवाई की मांग
तीमारदार सुमित्रा देवी, राजेश कुमार, चमन सिंह, योगराज, कमल कुमार, सुरेंद्र, मान सिंह, टेक चंद और रवि कुमार ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि जनऔषधि केंद्र की आड़ में चल रही इस अवैध वसूली को खत्म किया जाए।

हाथ से काटे जा रहे ब्रांडेड दवाइयों के बिल
जनऔषधि केंद्र में दवाइयों का पक्का बिल देने के लिए कंप्यूटर और प्रिंटर हैं। मगर वहां पर ब्रांडेड दवाओं के बिल हाथ से बनाकर दिए जा रहे हैं। यह बात भी लोगों की समझ नहीं आ रही है। जबकि कंप्यूटर में दवाई का नाम और कीमत टाइप करके पक्का बिल दिया जा सकता है।

24 घंटे नहीं खुलता जन औषधि केंद्र
जनऔषधि केंद्र को स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने चंबा दौरे के दौरान 24 घंटे खुला रखने के निर्देश दिए थे। मगर शाम पांच बजे के बाद जनऔषधि केंद्र पर ताला लटक जाता है। इसकी वजह से मरीजों को जेनेरिक दवाएं नहीं मिल पाती। केंद्र को 24 घंटे खुला रखने में अस्पताल प्रबंधन विफल हो रहा है।
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मामले की जाएगी गंभीरता से जांच: डॉक्टर ओहरी
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनिल ओहरी ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं है। अगर ऐसा हो रहा है तो इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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