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तीन दशकों के बाद भी नहीं हो पाया सिकरीधार सीमेंट प्लांट का निर्माण

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंबा। सिकरीधार प्लांट चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। इसके चलते जिले के लोगों में काफी आक्रोश है। तीन दशकों से सीमेंट प्लांट के निर्माण की आस में जिले के लोग हैं। मगर अब तक लोगों को कुछ हाथ नहीं लग पाया है। हर बार लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया है। जबकि कांग्रेस सीमेंट प्लांट नहीं लगने के मुद्दे को उछालती रही है। लेकिन पहल किसी भी सांसद और सरकार ने नहीं की।

जानकारी के अनुसार जिले के सुरंगाणी में 180 मेगावाट इकलौते बैरा सियूल पन विद्युत परियोजना के कार्य के दौरान सिकरीधार में सीमेंट में प्रयोग होने वाले मुख्य कच्चे माल लाइम स्टोन होने का आभास हुआ। इसके बाद मामला तत्कालीन नेतृत्व के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाया गया। सर्वे हुआ तो दशकों तक के लिए पर्याप्त लाइम स्टोन का भंडार पाया गया और शीघ्र सीमेंट प्लांट खोलना प्रस्तावित हुआ। हैरानी की बात तो यह है कि तीस सालों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी अभी तक सिकरीधार सीमेंट की फाइल पर जमी धूल नहीं छंट पाई है।
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गौरतलब है कि बिलासपुर जिले में काफी कम समय में एसीसी के तीन तीन कारखाने खुल गए, दाड़लाघाट नामक स्थान पर अंबुजा सीमेंट कारखाना चल रहा है। सिरमौर में कालाअंब और पांवटा साहब में आरसीसी और सीसीआई के नाम से सीमेंट कारखाने बने हैं। यहां हजारों लोगों को रोजगार मिला है। यहां तैयार हो रहा सीमेंट देश के कोने-कोने तक पहुंच रहा है। मगर चंबा की सिकरीधार सीमेंट नेताओं की घोषणाओं तक ही सिमट कर रह गया है।

सुभाष शर्मा, होशियार सिंह, तिलक राज, मखोली राम, धनी सिंह, आशा कुमारी, धनों और कश्मीरो का कहना है कि सीमेंट कारखाने के नाम पर उन्हें वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। मगर इस बार वह किसी भी नेता के झांसे में आने वाले नहीं है। लोगों का कहना है कि सरकार से वे पहले भी प्रोजेक्ट को शुरू करने का आग्रह कर चुके हैं। मगर अभी तक कोई पहल नहीं हो पाई है।
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पूरा नहीं हुआ शांता कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट
भाजपा सांसद शांता कुमार के लिए सिकरीधार सीमेंट प्लांट ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल रहा। मगर सांसद इसे पूरा नहीं कर पाए। हालांकि शांता कुमार ने हर बार सांसद बनने के लिए चंबा को वोट बैंक के लिए प्रयोग किया है।
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