अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। विश्व बैंक ने हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्र सरु में किया गया। कार्यशाला में चंबा और कांगड़ा के बागवानी विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला में न्यूजीलैंड की सात सदस्यीय टीम ने अधिकारियों और बागवानों को फलों के उत्पादन बढ़ाने व गुणवत्ता सुधारने के लिए तकनीक साझा की। इस दौरान टीम ने सेब के बगीचों के रख-रखाव और सेब के पौधों की कांट-छाट पर भी बागवानों और अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में चंबा और कांगड़ा जिला के एक सौ बागवानों ने भाग लिया। इसके बाद न्यूजीलैंड से आई टीम ने सरोल प्रदर्शनी में सेब के पौधों की कांट छांट का प्रशिक्षण दिया। इस परियोजना के तहत विदेशी सलाहकारों ने बागवानों और अधिकारियों को पहला परीक्षण प्रदान किया गया जो कि भविष्य में भी जारी रहेगा। इस संदर्भ में प्रशिक्षण मंगलवार को तीसा ब्लॉक में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विदेशी सलाहकारों ने बगीचों में सूर्य के प्रकाश की महत्ता, बगीचों के लिए भूमि का चयन, बगीचों के प्रबंधन के बारे, बगीचों में सीट नियंत्रण के तरीकों, बगीचों में सेब के पौधों की बनावट आदि विषयों पर चर्चा की। न्यूजीलैंड से आई टीम ने बताया कि उनके देश में 150 एमटी प्रतिशत हेक्टेयर सेब का उत्पादन किया जाता है। जबकि प्रदेश में यह मात्र दस से 15 एमटी प्रति हेक्टेयर है। इससे पहले टीम का एसएमएस राजीव चंद्रा ने स्वागत किया। उन्होंने बताया कि जिला में वर्ष 1960 से सेब की पैदावार की जा रही है। मगर अभी तक उन्नत और प्रचुर मात्रा में प्रति हेक्टेयर फसल का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। कार्यक्रम में न्यूजीलैंड के सलाहकार डॉ. डेविड मन्कटेलोव, डॉ. जिन वॉकर, डॉ. रश्मीकांत, डॉ. केन ब्रीन, डॉ. जैक हयूम्स और डॉ. माईक नैलसन, परियोजना सलाहकार डॉ. आईडी गुप्ता, बागवानी विभाग के उपनिदेशक केएल शर्मा, कांगड़ा उपनिदेशक डॉ. दौलत राम वर्मा के अलावा सामाजिक कार्यकर्त्ता ओपी शर्मा, परियोजना के सामाजिक विकास विशेष रमेश, एसएमएस डॉ. प्रमोद शाह, डॉ. सरिता, डॉ. अरविंद शर्मा, समीर राणा और उन्नतीशील बागवान एमके बडियाल और रंजन उपमन्यु मौजूद रहे।