चंबा। एक ओर जहां सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के दावे कर रही है तो वहीं दूसरी ओर जिला चंबा का राजकीय प्राथमिक स्कूल कुठेड़ एक ऐसा स्कूल है जहां 109 विद्यार्थियों के भविष्य का जिम्मा केवल एक अध्यापक के कंधों पर है। अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है।
ऐसा नहीं है कि इससे शिक्षा विभाग अनजान है लेकिन अभी तक स्कूल में स्टाफ तैनात नहीं किया गया है। जानकारी के मुताबिक स्कूल में वर्तमान में 20 विद्यार्थी प्री प्राइमरी कक्षा में पंजीकृत हैं और 89 विद्यार्थी पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक पंजीकृत हैं। इन सभी विद्यार्थियों का जिम्मा एक ही अध्यापक के पास है। जिले के कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की संख्या बेहद कम है और अध्यापक तय मानकों से ज्यादा तैनात कर दिए गए हैं।
ऐसे में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में स्टाफ की कमी की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालात यह हैं कि स्कूल में जब अध्यापक को किसी विभागीय बैठक में जाना होता है तो विद्यार्थियों को स्कूल में तैनात दैनिक वेतन भोगी कर्मी के हवाले छोड़ना पड़ रहा है। कुल मिलाकर जिले में स्कूलों में शिक्षकों की कमी भारी पड़ रही है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि यह मामला ध्यान में लाया गया है। कहा कि इसके बारे में जानकारी हासिल कर उचित व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा।