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Bilaspur News: इग्नू से कर सकेंगे जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पढ़ाई

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जुलाई सत्र से एमएससी इन क्लाइमेट चेंज और बैचलर ऑफ रूरल स्टडीज कोर्स हुए शुरू
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दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया हुई शुरू, 15 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन
बदलती वैश्विक एवं राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगारोन्मुख शिक्षा मिलेगी

प्रियंका ठाकुर
बिलासपुर। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने विद्यार्थियों के लिए दो नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। ये पाठ्यक्रम जुलाई 2026 सत्र से उपलब्ध होंगे। इनमें एमएससी इन क्लाइमेट चेंज और बैचलर ऑफ रूरल स्टडीज शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य बदलती वैश्विक एवं राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है।

इग्नू के माध्यम से विद्यार्थी अब घर बैठे जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पढ़ाई कर सकेंगे। इन नए पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक अभ्यर्थी 15 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। एमएससी इन क्लाइमेट चेंज पाठ्यक्रम दो वर्षीय है। इसमें मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक विद्यार्थी प्रवेश ले सकते हैं। इस पाठ्यक्रम में कुल 80 क्रेडिट होंगे। इसे न्यूनतम 2 साल में पूरा किया जा सकता है। अधिकतम चार वर्ष की अवधि में भी इसे बिना अतिरिक्त शुल्क के पूरा करने का विकल्प है।
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एक साल पूरा करने पर विद्यार्थी पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज का विकल्प चुन सकते हैं। इस पाठ्यक्रम की पढ़ाई अंग्रेजी भाषा में होगी। इस पाठ्यक्रम में जलवायु विज्ञान, जलवायु जोखिम और अनुकूलन रणनीतियां पढ़ाई जाएंगी। शमन रणनीतियां, पर्यावरणीय शासन और सतत विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जल संसाधन, ऊर्जा प्रणालियां और कृषि संबंधी अध्ययन भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जैव विविधता संरक्षण भी इसमें शामिल हैं। अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे। पर्यावरण कानून भी इस पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे पेशेवर तैयार करना है जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का वैज्ञानिक और टिकाऊ समाधान विकसित कर सकें। यह पाठ्यक्रम पर्यावरण, भूगोल, कृषि, आपदा प्रबंधन और सतत विकास के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं कार्यरत पेशेवरों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

वहीं, बैचलर ऑफ रूरल स्टडीज पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए विद्यार्थी का 12वीं पास होना अनिवार्य है। यह पढ़ाई मान्यता प्राप्त बोर्ड से होनी चाहिए। इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में पढ़ाई कर सकते हैं। इसकी न्यूनतम अवधि 3 साल निर्धारित की गई है। विद्यार्थी इसे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अधिकतम 6 साल तक पूरा कर सकते हैं। यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए है जो ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भविष्य बनाना चाहते हैं। सरकारी योजनाओं, गैर-सरकारी संगठनों और सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थी भी इससे लाभान्वित होंगे। इस पाठ्यक्रम में ग्रामीण अध्ययन का परिचय और पंचायत राज संस्थाएं शामिल हैं। ग्रामीण विकास, पर्यावरण अध्ययन और भारतीय प्रशासन भी इसके प्रमुख विषय हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, ग्रामीण आजीविका और ग्रामीण संचार भी इसमें पढ़ाए जाएंगे। बुनियादी ढांचा और ग्रामीण औद्योगिकीकरण जैसे विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। इस पाठ्यक्रम को पढ़ने के बाद विद्यार्थियों में ग्रामीण विकास की अच्छी समझ बनेगी। पंचायत, कृषि एवं ग्रामीण योजनाओं की भी उन्हें बेहतर जानकारी मिलेगी। संवाद
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कोट
एमएससी इन क्लाइमेट चेंज और बैचलर ऑफ रूरल स्टडीज पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक अभ्यर्थी दाखिले के लिए 15 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। प्रवेश, पात्रता, शुल्क और दस्तावेज के लिए अभ्यर्थी इग्नू की आधिकारिक वेबसाइट, अपने निकटतम इग्नू अध्ययन केंद्र अथवा क्षेत्रीय केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। -डॉ. विक्रम कपिल,इग्नू समन्वयक, स्टडी सेंटर 1174 राजकीय महाविद्यालय घुमारवीं
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