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बिलासपुर: पीला रतुए के कारण जिले में गेहूं की फसल 30 फीसदी नष्ट

Mon, 20 Feb 2023 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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रोग लगने से पीला हुआ गेंहू रंग। संवाद
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शाहतलाई(बिलासपुर)। जिले के करीब पैंसठ हजार किसान परिवारों को सूखा ग्रस्त मौसम और पीला रतुआ रोग के कारण गेहूं की फसल को लेकर भारी नुकसान होने की संभावना है। जिले में पहले बारिश न होने से गैर सिंचित क्षेत्रों में फसलों को 30 पहले ही नुकसान हो चुका है। ऐसे में करीब पैंसठ हजार किसान परिवारों को अपनी रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है।
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बीते जनवरी में चार माह के बाद बारिश होने से किसानों को उम्मीद जागी थी कि अब गेहूं की फसल का जो बीज खेतों में डाला है, वह वापस हो जाएगा, लेकिन बीते दो तीन दिन से गेहूं की पौध पर पीले रतुए ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है, जिस से किसान चिंतित हो गए हैं। बीते साल भी पीले रतुए से किसानों की 50 फीसदी फसल बरबाद हो गई थी। बिलासपुर में कुल 31813 हेक्टेयर भूमि कृषि क्षेत्र के तहत आती है। जिले के 65 हजार किसान परिवार का गुजर बसर कृषि पर निर्भर है। जिला में 28.906 हेक्टेयर कृषि भूमि गैर सिंचित है, जबकि 2.907 हेक्टयेर भूमि पर सिंचाई होती है। गैर सिंचित क्षेत्रों में सूखे के कारण गेहूं की फसल उग ही नहीं पाई थी। जबकि सिंचाई व गैर सिंचाई वाले क्षेत्रों में जहां नमी के चलते गेहूं उग आया था और जनवरी में हुई बारिश से किसानों की उम्मीद जगी थी लेकिन उस पर पीले रतुए ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। अब किसानों को डर सता रहा है कि बीते साल की भांति इस वर्ष भी उन्हें बीजा हुआ बीज भी वापस न होगा। किसान प्रकाश चंद, प्रेम चंद, राम रतन, संजय कुमार, सुशील कुमार, राजेंद्र कुमार, बलदेव कुमार, रमेश चंद, दीना नाथ, उतम चंद, राजकुमार, कर्म चंद, परस राम, जरनैल सिंह, मनेंद्र सिंह, किशोरी लाल, चमल लाल का कहना है कि मौसम के बदले मिजाज से फसल पर बीमारी लगने से हरे भरे खेत पीले पड़ने लगे है। उन्हें उम्मीद थी कि जनवरी में हुई बारिश ने चार माह के सूखे से गेहूं की फसल को हुए नुकसान की भरपाई हो जाएगी। लेकिन बीते दो-तीन दिन से पीले रतुए ने सब बेकार कर दिया है। इससे हम लोग चिंतित हैं।
उल्लेखनीय है कि पीले रतुएं से ग्रस्त पौध में गेहूं के दाने पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते है। उधर, कृषि विशेषज्ञ करतार सिंह कश्यप ने किसानों को सलाह दी है कि बीमारी की रोक थाम के लिए टिल्ड, रिडोमिल, मैट की दवाइयों का छिड़काव पंद्रह-पंद्रह दिनों के अंतराल में करें।
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