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Bilaspur News: गोबिंदसागर झील में वाटर स्पोर्ट्स, मंडी-भराड़ी में ग्लास ब्रिज और केबल कार मिलेगी सुविधा

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मंडी भराड़ी पुल, जहां बनेगा ग्लास ब्रिज। स्रोत: सोशल मीडिया
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फ्लोटिंग रेस्तरां और जिप लाइन भी बनेंगे आकर्षण, बिलासपुर में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
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दोनों परियोजनाओं के लिए 16 नवंबर तक जमा होंगी निविदाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंदसागर झील में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दो बड़ी परियोजनाएं विकसित करने की तैयारी है। मंडी-भराड़ी में ग्लास ब्रिज, केबल कार, जिप लाइन और फ्लोटिंग रेस्तरां बनाने की योजना है। वहीं, झील के दो अलग-अलग क्षेत्रों में वाटर स्पोर्ट्स और इससे जुड़ी पर्यटन गतिविधियां संचालित की जाएंगी। पर्यटन, खेल, व्यापार एवं रोजगार सृजन सोसायटी बिलासपुर ने दोनों परियोजनाओं के लिए ई-निविदाएं आमंत्रित की हैं। इच्छुक फर्में 16 नवंबर 2026 शाम पांच बजे तक ऑनलाइन निविदाएं जमा करवा सकती हैं। मंडी-भराड़ी में प्रस्तावित परियोजना का प्रमुख आकर्षण स्काई वॉक यानी ग्लास ब्रिज होगा। चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन पर स्थित क्रेन संरचना के ऊपर पर्यटकों और पैदल यात्रियों के लिए ग्लास ब्रिज विकसित करने की योजना है। इसके साथ गोबिंदसागर झील के ऊपर आधुनिक 3एस केबल कार भी प्रस्तावित है। इससे पर्यटकों को जलाशय और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने का अवसर मिल सकेगा। परियोजना के तहत जलाशय के आर-पार जिप लाइन और रिवर क्रॉसिंग जैसी साहसिक गतिविधियां भी विकसित की जाएंगी। क्रेन के ड्राइवर केबिन क्षेत्र में फ्लोटिंग रेस्तरां बनाने की योजना है। इन सुविधाओं से पर्यटकों को एक ही स्थान पर मनोरंजन और साहसिक पर्यटन के कई विकल्प मिल सकेंगे। इससे मंडी-भराड़ी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
दो क्षेत्रों में होंगी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां
गोबिंदसागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के संचालन के लिए दो क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। पहले क्षेत्र में मंडी-भराड़ी से नकराना होते हुए भाखड़ा तक और दूसरे क्षेत्र में लुहणू से मंडी-भराड़ी तक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। दोनों क्षेत्रों में संचालन के लिए अलग-अलग ऑपरेटर चुने जाएंगे। इससे जलाशय के विभिन्न हिस्सों में जल पर्यटन को विस्तार देने की योजना है।
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पीपीपी मॉडल पर विकसित होगी मंडी-भराड़ी परियोजना
मंडी-भराड़ी की परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। चयनित एजेंसी डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन, प्रबंधन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। वहीं, वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए अलग से ऑपरेटर का चयन किया जाएगा।
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कोट
विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ 16 सितंबर को मौके पर पहुंचकर परियोजना की संभावनाओं का जायजा लिया है। क्रेन संरचना की सुरक्षा और तकनीकी उपयुक्तता की जांच राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर की विशेषज्ञ टीम से करवाई गई है। जांच में संरचना को सुरक्षित और प्रस्तावित परियोजना के लिए उपयुक्त पाया गया है। इन परियोजनाओं से गोबिंदसागर झील में पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों को नए अनुभव मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
-राहुल कुमार,उपायुक्त
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