बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान टिहरा टनल हादसे की जांच पांच साल के बाद भी विभाग नहीं कर पाया है। जबकि इस टनल हादसे के बाद टनल में दबे लोगों को करोड़ों रुपये खर्च कर बचाया गया था। जबकि एक व्यक्ति की हादसे में मौत हो गई थी लेकिन इसके बाद भी पांच साल होने को है लेकिन हादसा कैसे हुआ इसका पता लगाना प्रशासन और सरकार ने जरूरी नहीं समझा।
जिला राजस्व अधिकारी देवी सिंह कार्यालय से मिली जानकारी में खुलासा हुआ है कि हादसे के बाद सरकारी अमले ने इसकी जांच करना तक जरूरी नहीं समझा। उल्लेखनीय है कि साल 2015 में सड़क निर्माण कर रही कंपनी आईएल एंड एफएस की लापरवाही से टिहरा टनल हादसे में तीन लोग दब गए थे जिसमें दो लोगों को करीब दस दिनों के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। जबकि एक आदमी की मौत हो गई जिस पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने कार्यालय उपायुक्त जिला बिलासपुर से जानकारी मांगी थी कि साल 2015 में हुए इस इतने बड़े हादसे में राज्य सरकार, केंद्र सरकार या अन्य किसी एजेंसी के माध्यम से किसी प्रकार की कोई जांच करवाई हो तो उस जांच की छाया प्रतियां उपलब्ध करवाई जाएं।
इस पर उपरोक्त कार्यालय में किसी प्रकार की कोई जानकारी होने से साफ मना किया है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति में आरोप लगाए हैं कि यह हादसा कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी बल्कि कंपनी द्वारा सुनियोजित योजना के तहत किया गया। इसमें कंपनी की बेतरतीब ब्लास्टिंग से यह हादसा हुआ। इसके बाद प्रशासन ने किसी प्रकार की कोई जांच करवाना उचित नहीं समझा। इस पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद 2 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान राकेश कुमार, चिंता देवी, बलदेव, सुभाष, महेंद्र, जगदीश, सीता राम, जगत राम और महासचिव व पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने राज्य सरकार से मांग की है कि टिहरा टनल हादसे की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच करवाई जाए।