हिमाचल सरकार जहां प्रदेश को खुला शौच मुक्त के सम्मान से प्रदेश की पंचायतों को सम्मानित कर रही है, वहीं ग्राम पंचायत बरठीं के पशु चिकित्सालय में आजादी के 62 वर्षों बाद भी शौचालय का निर्माण नहीं किया गया है। इससे क्षेत्र के खुले में शौच मुक्त होने के दावे खोखले साबित हो रहे है। हालत यह है कि पशु चिकित्सालय में शौचालय न होने के कारण न तो कोई चिकित्सक यहां रहता है और न ही अन्य कर्मचारी।
उल्लेखनीय है कि 1954 में बने इस पशु चिकित्सालय में शौचालय न होने के कारण पशु चिकित्सक को किराया का मकान लेकर रहना पड़ रहा है। वहीं फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रहने के लिए बने कमरों में शौचालय न होने से वह खंडहर बन चुके हैं।
चिकित्सा केंद्र में पशुओं को लेकर आने वाले लोगों को भी शौचालय न होने के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और दो भवन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए चिकित्सालय परिसर में बनाए गए हैं।
मगर वहां किसी भी कर्मचारी के न रहने से वह जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। चिकित्सा केंद्र में तैनात चिकित्सक डॉ. विपिन रांगडा ने बताया कि न तो शौचालय भवनों में बने हैं और न ही चिकित्सा केंद्र में हैं।
इस कारण उनके साथ-साथ पशुओं को लेकर आ रहे उनके लोगों और खासकर महिलाओं और अन्य कर्मचारियों को भी भारी असुविधा उठानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों को शौचालय निर्माण के लिए करीब डेढ़ वर्ष पहले एक एस्टीमेट भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई भी कार्यवाई अमल में नहीं लाई गई है।
कार्यकारी पशु उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र कपिल ने बताया कि बरठीं की समस्या उनके ध्यान में है। एक एस्टीमेट उन्हें मिला है। इसको शिमला भेज दिया गया है, जैसे ही उसकी स्वीकृति मिलेगी बरठीं चिकित्सालय में शौचालयों का निर्माण कर दिया जाएगा।