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Bilaspur News: विवाहिता के घर में घुसकर हमला, गर्दन पर वार करने वाले को तीन साल की सजा

Wed, 17 Jun 2026 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से
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दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने फैसले में किया बरी
घर में घुसने, चोट पहुंचाने और महिला के साथ छेड़छाड़ मामले में दोषी करार
2021 के मामले में अदालत ने पीड़िता की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जताया भरोसा

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने वर्ष 2021 में दर्ज एक मामले में एक व्यक्ति को विवाहिता के घर में घुसकर हमला करने, धारदार हथियार से चोट पहुंचाने और महिला के साथ छेड़छाड़ की एक धारा में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने उसे दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 31 जुलाई 2021 की रात करीब 11:30 बजे पीड़िता अपने नए घर में मौजूद थी। वह अपने पति और रिश्तेदारों से फोन पर बातचीत करने के बाद कमरे से बाहर गई थी। जब वह वापस कमरे में लौटी तो वहां एक व्यक्ति पहले से मौजूद था। पीड़िता के अनुसार उसे देखते ही उसने शोर मचाया, जिस पर आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया और गर्दन पर किसी धारदार वस्तु से वार कर दिया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसने जबरन शारीरिक संबंध बनाने की बात भी कही। जान बचाने के लिए पीड़िता वहां से निकलकर पड़ोसी के घर पहुंची, जहां से उसके परिजनों और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और घायल अवस्था में उसे सिविल अस्पताल घुमारवीं पहुंचाया गया। बाद में उसके बयान के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
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घटनास्थल से मिले साक्ष्यों ने मजबूत किया मामला
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से खून के नमूने, पीड़िता के रक्तरंजित कपड़े और एक चाकू बरामद किया। इन सभी वस्तुओं को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट में घटनास्थल और कपड़ों पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि हुई। चाकू पर भी रक्त के अंश पाए गए। मेडिकल परीक्षण के दौरान पीड़िता की गर्दन पर दो चोटें दर्ज की गईं। चिकित्सक ने चोटों को साधारण प्रकृति का बताया, लेकिन यह भी कहा कि वे किसी धारदार हथियार से लग सकती थीं। अदालत ने माना कि मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और पीड़िता की गवाही एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुरानी रंजिश और झूठा फंसाए जाने की दलील दी। अदालत ने कहा कि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने यह भी माना कि गवाहों के बयानों में बताए गए छोटे-मोटे विरोधाभास इतने महत्वपूर्ण नहीं हैं कि उनसे पूरे मामले पर संदेह किया जा सके। फैसले में अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि आरोपी ने दुष्कर्म करने की दिशा में ऐसा कोई प्रत्यक्ष कदम उठाया था जिसे कानून की दृष्टि में दुष्कर्म का प्रयास माना जा सके। अदालत के अनुसार केवल जबरन शारीरिक संबंध बनाने की बात कहना पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर आरोपी को आरोप से बरी कर दिया गया। हालांकि अदालत ने यह माना कि आरोपी ने विवाहिता के घर में अवैध रूप से प्रवेश किया, उसे चोट पहुंचाई और उसके साथ बल प्रयोग किया। इसलिए उसे दोषी ठहराया गया। सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोषी को प्रथम अपराधी बताते हुए प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ देने की मांग की। अदालत ने यह मांग खारिज करते हुए कहा कि मामला महिला के विरुद्ध गंभीर अपराध से जुड़ा है और ऐसे मामलों में नरमी बरतना उचित नहीं होगा।
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इनसेट

तीन वर्ष की प्रभावी सजा

अदालत ने दोषी को धारा 452 के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 323 के तहत छह माह के साधारण कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 324 के तहत दो वर्ष के साधारण कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 354-बी के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे प्रभावी सजा तीन वर्ष रहेगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि वसूल की गई जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में प्रदान की जाएगी। साथ ही मुकदमे के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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