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हर दिन जो सरक रहा है, बदल रहा हैउसे संसार कहते हैं : आचार्य निखिल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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झंडूता(बिलासपुर)। ग्राम पंचायत गालियां के शिव मंदिर बरोहा में चल रही शिव महापुराण कथा के आखिरी दिन आचार्य निखिल महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन सुनाते हुए कहा कि हर दिन जो सरक रहा है, खिसक रहा है, जो प्रतिक्षण बदल रहा है उसे संसार कहते हैं। उसके बदलने में हमारा कोई हाथ नहीं है। कोई भूमिका नहीं है। हमारे चाहने न चाहने से इसके बदलने के स्वभाव पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
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उन्होंने कहा कि हम रोये या हंसे यह तो निरंतर बीत रहा है। जो अचल है अपरिवर्तनशील है, उसे हम ईश्वर कहते हैं। सिर्फ ईश्वर के अलावा कुछ भी स्थायी नहीं है। वही ईश्वर शुद्ध है, मुक्त है, अविनाशी है, सत्य है, सुंदर है, और उसे ही शिव कहते हैं। भगवान शिव देव ही नहीं हैं यह देवों के देव महादेव हैं। शिव का संबंध जिससे भी हो गया वह साधारण न होकर महान हो गया। उन्होंने कहा कि शिव की कथा जिस स्थान पर होती है वह स्थान नहीं कहलाता महास्थान हो जाता है। शिव की पूजा, पूजा नहीं महापूजा है। शिव का प्रसाद नहीं है, महाप्रसाद है। शिव की आरती, आरती नहीं महाआरती है। शिव की रात्रि भी रात्रि नहीं कहलाती, महाशिवरात्रि कहलाती है। शिव की कथा कहना, सुनना पुण्य नहीं महापुण्य है। शिव की कथा भाग्य से नहीं महाभाग्य से मिलती है और जब भी जीवन में शिव का नाम आ जाए उसे ही सौभाग्य कहते हैं। शिव की कथा सुनने वाला आत्मा न होकर महात्मा हो जाता है। इस अवसर पर मंदिर कमेटी प्रधान दिलबाग जम्वाल, नरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार,प्रदीप कुमार, राज पाल राज कुमार सहित दर्जनों श्रद्धालु उपस्थित रहे। शिव महापुराण कथा का समापन मंगलवार को हवन यज्ञ और भंडारे के साथ होगा।
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