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Bilaspur News: पदोन्नत प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने की संघ ने की निंदा

Sun, 26 Oct 2025 11:45 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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प्रवक्ता संघ का कहना, वरिष्ठता अथवा कनिष्ठता का निर्धारण करना विभाग का कार्य, न की शिक्षक का
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पदाधिकारियों ने विद्यालय शिक्षा निदेशक से जारी निर्देशों को तुरंत वापस लेने की उठाई मांग

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ बिलासपुर ने शिक्षा निदेशालय की ओर से हाल ही में 2019 से लेकर 2025 के मध्य 592 पदोन्नत प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने की कड़ी निंदा की है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय पूर्णत: अनुचित, निराधार और शिक्षकों का मनोबल गिराने वाला हैं।
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संघ के अध्यक्ष नरेश ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलवंत ठाकुर, महासचिव सुशील चंदेल, वित्त सचिव विकास चौहान, चेयरमैन सुरेंद्र सिंह रनौत, मुख्य प्रेस सचिव यशपाल शर्मा, मुख्य वेब सचिव राजीव चौधरी, मुख्य एडवाइजर सुरेश कुमार सहित अन्य सभी सदस्यों ने संयुक्त रूप से कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया विभाग द्वारा सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद की जाती है। ऐसे में पदोन्नत शिक्षकों को प्रताड़ित करना विभागीय असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठता अथवा कनिष्ठता का निर्धारण करना विभाग का कार्य है, किसी शिक्षक का नहीं। यदि किसी स्तर पर त्रुटि हुई है तो उसकी जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों की बनती है, न कि 2019 से 2025 के पदोन्नत शिक्षकों की। संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि यह स्थिति विभाग द्वारा न्यायालयों के आदेशों का समय पर पालन न करने के कारण उत्पन्न हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुबंध अवधि के वेतनवृद्धि एवं वरिष्ठता मामलों पर विभाग द्वारा न्यायालय के आदेशों के अनुरूप गंभीरता से कार्रवाई न किए जाने से भविष्य में भी ऐसी जटिलताएं उत्पन्न होने की पूरी आशंका बनी हुई है। संघ के पदाधिकारियों ने विद्यालय शिक्षा निदेशक से आग्रह किया है कि जारी निर्देशों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए और पदोन्नत प्रवक्ताओं की स्थिति यथावत रखी जाए। साथ ही कनिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति के लिए विभाग को अन्य वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा जिले के सभी प्रवक्ताओं ने भी इस निर्णय का पुरजोर विरोध किया है और इसे प्रवक्ता वर्ग के सम्मान पर कुठाराघात बताया है। सभी जिला प्रवक्ताओं ने मांग की है कि विभाग तुरंत इस आदेश को वापस लेकर शिक्षकों के सम्मान की रक्षा करें।
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