बिलासपुर के ऋषिकेश घाट पर बेड़ा तारने पहुंचे लोग। संवाद
भाद्रपद माह के चलते घाट पर पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु
किया दान-पुण्य, भजन-कीर्तन से गूंजा वातावरण
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश(बिलासपुर)। भाद्रपद के अवसर पर गोबिंद सागर झील किनारे ऋषिकेश घाट पर बेड़ा तारने की परंपरा निभाई जा रही है। रविवार को भी सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे और सदियों पुरानी परंपरा बेड़ा तारने का अनुष्ठान पूरा किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आभूषण, वस्त्र और अन्य सामग्री दान की।
घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और वातावरण उत्साह व आस्था से सराबोर रहा। जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से लोग विशेष बसों और वाहनों के माध्यम से ऋषिकेश घाट पर पहुंचे। ऋषिकेश घाट की मान्यता है कि भाद्रपद माह में बेड़ा तारने से मृत्यु के उपरांत आत्मा भवसागर से पार होकर बैकुंठ धाम तक पहुंचती है। इसी विश्वास से पीढ़ियों से लोग इस अनुष्ठान में शामिल होते आ रहे हैं। श्रद्धालु अपने घरों से पूजा सामग्री लेकर घाट पर पहुंचते हैं और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माल, वस्त्र व आभूषण बेड़े में अर्पित करते हैं। इस दौरान घाट पर भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया, जिसमें महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बुजुर्ग बताते हैं कि ऋषिकेश घाट पर बेड़ा उतारने की यह परंपरा बहुत प्राचीन है और हर वर्ष भाद्रपद माह में हजारों की संख्या में लोग यहां जुटते हैं। उनका कहना है कि इस धार्मिक परंपरा से जुड़ा विश्वास आज भी लोगों को आकर्षित करता है। दिनभर घाट पर श्रद्धालु आते रहे और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अनुष्ठान संपन्न करते रहे। घाट परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ देखते हुए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था भी की गई थी ताकि लोग सुचारू रूप से पूजा-अर्चना कर सकें।