नाल्टी, परनाल, मैहरी काथला क्लस्टरों से गई 1400 किलो की खेप, 38 रुपये प्रति किलो मिला मूल्य
किसानों ने खुद संभाली विपणन की जिम्मेदारी, बिचौलियों पर नहीं रहे निर्भर
उत्पादक से उद्यमी बनने की दिशा में पूरी तरह से अग्रसर हैं प्रदेश के किसान : डॉ. देवेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एचपी शिवा परियोजना के तहत जिले के किसानों ने ‘बीज से बाजार तक’ की अवधारणा को साकार करते हुए एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। परियोजना के अंतर्गत जिले से मीठे संतरे की आठवीं खेप रिलायंस रिटेल स्टोर, राजपुरा (पंजाब) को भेजी गई है।
यह खेप नाल्टी, परनाल और मेहरी काथला क्लस्टरों से एकत्र की गई, जिसमें लगभग 1400 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला मीठा संतरा शामिल रहा। किसानों में विजय कुमार और उनके साथियों ने स्वयं इस खेप को राजपुरा तक पहुंचाया। रिलायंस रिटेल ने इस उपज को 38 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा, जिससे किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ। किसानों की यह पहल दर्शाती है कि अब वे बिचौलियों पर निर्भर हुए बिना सीधे बाजार से जुड़ने में सक्षम हो रहे हैं। यह न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि किसानों में आत्मविश्वास और व्यावसायिक समझ को भी मजबूत कर रहा है। परियोजना निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना का उद्देश्य किसानों को आधुनिक बाजार प्रणाली से जोड़ते हुए उन्हें उत्पादक से उद्यमी बनाना है। उन्होंने बताया कि अब तक मंडी और कांगड़ा जिलों से भी रिलायंस रिटेल को मीठे संतरे की खेप भेजी जा चुकी हैं और कुल मिलाकर लगभग 30 मीट्रिक टन स्वीट ऑरेंज की आपूर्ति सफलतापूर्वक की गई है। कहा कि रिलायंस जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ साझेदारी हिमाचल के बागवानों के लिए स्थायी बाजार अवसरों के द्वार खोल रही है। यह पहल राज्य को भारत का फल राज्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
उप निदेशक (उद्यान) डॉ. जगदीश वर्मा ने कहा कि एचपी शिवा परियोजना ने जिले के बागवानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। पहले किसान केवल उत्पादन तक सीमित थे, लेकिन अब वे सीधे बाजार से जुड़कर अपने उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त कर रहे हैं। सहायक परियोजना निदेशक डॉ. रमल अंगरिया ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना में किसानों की क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को ग्रेडिंग, पैकिंग, गुणवत्ता मानकों, ब्रांडिंग और विपणन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें। कहा कि परियोजना न केवल किसानों को सीधे बाजार से जोड़ रही है, बल्कि उन्हें स्थायी आय, गुणवत्ता उत्पादन और मूल्यवर्धन की दिशा में भी सशक्त कर रही है।