शिव मंदिर बछड़ी मसधाण में आयोजित कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
शिव मंदिर बछड़ी मसधाण में कथा का सातवां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत मोरसिंघी के महाकालेश्वर शिव मंदिर बछड़ी मसधाण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कथा के दौरान कथावाचक पंडित पंकज भारद्वाज ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं केवल चमत्कार नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली शिक्षाएं हैं। कथा के दौरान श्री कृष्ण के नामकरण संस्कार, माखन चोरी और बाल्यकाल की अन्य लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। कथावाचक ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से जहां कंस द्वारा भेजे गए विभिन्न राक्षसों का संहार किया। वहीं, ब्रजवासियों को आनंद और सुरक्षा प्रदान की। उन्होंने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया कि देवराज इंद्र को अपनी शक्ति और सत्ता पर अहंकार हो गया था। इस अहंकार को दूर करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इंद्र के क्रोधित होने पर ब्रज में भीषण वर्षा शुरू हो गई, जिससे जनजीवन संकट में आ गया। ऐसे समय में भगवान श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। सात दिनों तक लगातार वर्षा के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उसने भगवान से क्षमा याचना की। कथा के दौरान संगीतमय भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रधान देश राज एवं अन्य सदस्यों ने बताया कि रविवार को कथा के समापन अवसर पर पूर्ण आहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया।