- श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्रीमद्भागवत आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित हंसराज शर्मा ने कहा कि जीवन की महान सच्चाई मौत है। कोई भी जीव इससे बच नहीं सका है।
संसार में जो भी जीव आता है। उसे संसार छोड़कर अवश्य जाना पड़ता है। आवागमन ही संसार की रीत है। उन्होंने राजा परीक्षित की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि जब भागवत कथा सुनाते हुए शुकदेव को छह दिन बीत गए और उनकी मृत्यु में बस एक दिन शेष रह गया, लेकिन राजा का शोक और मृत्यु का भय कम नहीं हुआ तब शुकदेव जी ने राजा को एक कथा सुनाई कि एक राजा जंगल में शिकार खेलने गया और रास्ता भटक गया। रात होने पर वह आसरा ढूंढने लगा। उसे एक झोपड़ी दिखी, जिसमें एक बीमार बहेलिया रहता था। उसने झोपड़ी में ही एक ओर मल मूत्र त्यागने का स्थान बना रखा था और अपने खाने का सामान झोपड़ी की छत पर टांग रखा था। उसे देखकर राजा ने बहेलिए से झोपड़ी में रातभर ठहरा लेने की प्रार्थना की। बहेलिया बोला कि मैं राहगीरों को अक्सर ठहराता रहा हूं, लेकिन दूसरे दिन जाते समय वह झोपड़ी छोड़ना ही नहीं चाहते। इसलिए आपको नहीं ठहरा सकता। राजा ने उसे वचन दिया कि वह ऐसा नहीं करेगा। सुबह उठते-उठते उस झोपड़ी की गंध में राजा ऐसा रच बस गया कि वहां रहने की बात सोचने लगा। इस पर उसकी बहेलिए से कलह भी हुई। कथा सुनकर शुकदेव ने परीक्षित से पूछा क्या उस राजा के लिए यह झंझट उचित था। परीक्षित ने कहा वह तो बड़ा मूर्ख था, जो अपना राजकाज भूलकर दिए हुए वचन को तोड़ना चाहता था। वह राजा कौन था, तब शुकदेव ने कहा कि परीक्षित वह तुम स्वयं हो। इस मल मूत्र की कोठरी देह में तुम्हारी आत्मा की अवधि पूरी हो गई। अब इसे दूसरे लोक जाना है, पर तुम झंझट फैला रहे हो। परीक्षित का विवाह उत्तर के राजकुमार की बेटी इरावती से हुआ। इरावती और परीक्षित के चार बेटे हुए, जिनमें एक जनमेजय था। उन्होंने बताया कि शिक्षा ग्रहण करने के बाद परीक्षित ने शुकदेव से कहा कि अब उन्हें सांपों के काटने का कोई डर नहीं है। उन्होंने आत्मा और ब्रम्हा की प्रकृति को जान लिया है। जब शुकदेव चले गए तो परीक्षित ने बैठकर ध्यान लगाना शुरू कर दिया। इसी दौरान उस काल के प्रचलित नाग वंश तक्षक का एक नाग ब्राह्मण की वेशभूषा में उनके नजदीक आया। उन्होंने परीक्षित को काट खाया और इससे परीक्षित की मौत हो गई। कथा समापन पर सभी को प्रसाद वितरित किया गया।